
representative picture (AI)
अलवर शहर को हर बारिश में होने वाले जलभराव से स्थायी राहत दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शहरी विकास न्यास (यूआईटी) ने शहर के लिए आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी आईआईटी खड़गपुर को सौंपी है। संस्थान के इंजीनियरों की टीम अलवर पहुंच चुकी है और सर्वे कार्य शुरू करने की तैयारी में जुट गई है।
टीम करीब 120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का अध्ययन करेगी, जिसमें शहर का अधिकांश हिस्सा और अग्यारा क्षेत्र तक का इलाका शामिल रहेगा। सर्वे के लिए ड्रोन मैपिंग की जाएगी। इसके लिए यूआईटी ने जिला प्रशासन से ड्रोन उड़ाने की अनुमति मांगी है। ड्रोन सर्वे के जरिए जल निकासी के प्राकृतिक मार्ग, निचले क्षेत्र और जलभराव वाले स्थानों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा।
यूआईटी अधिकारियों के अनुसार 15 अगस्त तक प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट के आधार पर शहर के लिए वैज्ञानिक और दीर्घकालिक ड्रेनेज प्लान तैयार किया जाएगा। इसके बाद भविष्य की सड़क, कॉलोनी और अन्य विकास परियोजनाओं को भी इसी योजना के अनुरूप विकसित किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना पूरी होने पर अलवर में प्रदेश के सबसे आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम की नींव रखी जाएगी, जिससे मानसून के दौरान जलभराव की समस्या में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अलवर शहर में ड्रेनेज सिस्टम के लिए नगर निगम व यूआइटी की ओर से 29 बड़े नाले बनाए गए। इन्हीं से छोटी नालियां जोड़ी गई। वार्डों की नालियों का जुड़ाव मुख्य नालों से नहीं हो पा रहा है। साथ ही, सड़कों के पास गुजर रहे नालों में भी छोटे पाइप लगाने के कारण बारिश का पानी पूरा नहीं निकल पा रहा है, जिससे जलभराव हो रहा है। इसे देखते हुए राजस्थान पत्रिका ने मुद्दा कई बार उठाया और प्रशासन ने गंभीरता से लिया। अब आइआइटी खड़गपुर के इंजीनियर 120 वर्ग किमी एरिया में सर्वे करेंगे। यह सर्वे एक साल में पूरा हो पाएगा, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट यूआइटी के पास 15 अगस्त तक आ जाएगी। इस कार्य के लिए यूआइटी ने 2.2 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
इस सर्वे के जरिए प्रशासन का प्रयास है कि यहां आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया जाए, जो अब तक प्रदेश के किसी शहर में नहीं है। अलवर आबादी व विस्तार के मुताबिक छोटा है। ऐसे में यहां यह सिस्टम दौड़ सकेगा और जलभराव से दो से तीन साल में मुक्ति मिलने की संभावना है।
आइआइटी खड़गपुर के इंजीनियर सर्वे के लिए आ गए हैं। शहर में जहां-जहां जलभराव होगा, वहां ये इंजीनियर सर्वे करेंगे। यह 120 वर्ग किमी का एरिया कवर करेंगे। ड्रोन उड़ाने की अनुमति के लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है। 15 अगस्त तक हमें प्रारंभिक सर्वे रिपोर्ट मिल जाएगी - स्नेहल नाना, सचिव, यूआइटी
Updated on:
28 Jul 2026 12:21 pm
Published on:
28 Jul 2026 12:21 pm
