
alwar letest news पंचायत पुनर्गठन से गड़बड़ाई गांवों की राजनीति, विरोध के स्वर गंूजे
अलवर. पंचायत पुनर्गठन alwar letest news के तहत अलवर जिले में 57 नई ग्राम पंचायत बनने एवं 176 पंचायतों के पुनर्गठन ने जिले की आधी से ज्यादा पंचायतों के स्वरूप को छिन्न-भिन्न कर दिया है। ज्यादातर ग्राम पंचायतों का स्वरूप बदलने से गांवों की राजनीति गड़बड़ा गई है। पंचायतों में वोटों का गणित भी बदल गया है। इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में अब पंचायत पुनर्गठन के विरोध में ग्रामीणों के विरोधी स्वर भी उठने लगे हैं।
पंचायत पुनर्गठन के प्रस्तावों में सबसे ज्यादा उलटफेर लक्ष्मणगढ़, रामगढ़, उमरैण, थानागाजी, तिजारा, बानसूर, मुण्डावर सहित अन्य पंचायत समितियों में होगा। नई ग्राम पंचायतों में पूर्व की पंचायतों के गांवों को नव सृजित पंचायतों में जोड़ दिया गया। इससे पुरानी ग्राम पंचायतों का स्वरूप ही बदल गया।
57 नई पंचायत बनने से 176 का बदला स्वरूप
alwar letest news जिले में 57 नई ग्राम पंचायत बनने से 176 ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन करना पड़ा है। इससे 176 ग्राम पंचायतों का स्वरूप बदल गया है। पुनर्गठन में कई पंचायतों के गांव इधर-उधर हो गए हैं।
वोटों का गणित बदला
पंचायतों के पुनर्गठन से जिले की ज्यादातर पंचायतों में वोटों का गणित बदल गया। इससे पंचायतों की राजनीति में रूचि रखने वाले ज्यादातर लोगों का चुनावी गणित गड़बड़ा गया है।
विरोध के स्वर भी उठे
पंचायत पुनर्गठन के चलते ग्राम पंचायतों का स्वरूप बदलने का नतीजा यह हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत पुनर्गठन को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। सबसे ज्यादा विरोध उमरैण, मांढण, कठूमर आदि पंचायत समितियों में हैं। ज्यादातर लोगों का आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के चलते गांवों को दूसरी पंचायतों में जोड़ा या काटा गया है। कई स्थानों पर उपखंड अधिकारियों पर भी मनमर्जी के चलते पंचायत पुनर्गठन के प्रस्ताव तैयार करने का आरोप लगाया गया है।
कठूमर में सर्वाधिक विरोध
पंचायत पुनर्गठन प्रक्रिया का सबसे ज्यादा विरोध कठूमर पंचायत समिति के खेरली रेल ग्राम पंचायत को पुनर्गठन प्रक्रिया से बाहर रखने का हुआ है। खेरली रेल ग्राम पंचायत की आबादी करीब 9 हजार 558 है। आबादी के हिसाब से खेरली रेल ग्राम पंचायत का पुनर्गठन जरूरी था। पुनर्गठन के नियमानुसार एक ग्राम पंचायत की आबादी 4500 से 6000 के बीच होनी चाहिए। खेरली रेल ग्राम पंचायत की आबादी 9 हजार 558 होने के कारण इस पंचायत को दो भागों में बांटकर नई पंचायत का गठन किया जाना था, लेकिन नई ग्राम पंचायत सृजित नहीं की गई है।
ग्राम पंचायत खेरली रेल के गांव कुट्टीन साहबदास निवासी सुरेश मीणा का कहना है कि खेरली रेल की आबादी करीब 7000 हजार है, इस कारण खेरली रेल को अलग से नई पंचायत बनाया जाना चाहिए था। कुट्टीन साहबदास, बंधन का नंगला, गहलावता व पदमपुरा को मिलाकर नई ग्राम पंचायत बनाई जानी चाहिए थी। जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति, अन्य गांवों से कनेक्टिविटी, अपराध नहीं होने सहित अन्य अर्हता पूरी करने के कारण कुट्टीन साहबदास को नई पंचायत बनाने की जरूरत थी, लेकिन पुनर्गठन प्रस्तावों में यह नहीं किया गया। क्षेत्रीय विधायक को अवगत कराया और जिला कलक्टर को भी जानकारी दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि उपखंड अधिकारी ने स्वयं के स्तर पर प्रस्ताव भेज दिया, जिसमें नियमों का ध्यान नहीं रखा गया।
ग्राम पंचायत पुनर्गठन में आनंदपुर गांव को नानकवास ग्राम पंचायत में शामिल करने से भी ग्रामीणों में रोष है। आनंदपुर सरपंच राजपाल यादव का कहना है कि आनंदपुर से नानकवास की दूरी ज्यादा है और दोनों गांवों की सीमा भी नहीं लगती। इसलिए आनंदपुर को नानकवास गांव में शामिल करने का विरोध किया जाएगा। चावंडी निवासी हाकीराम यादव का कहना है कि आनंदपुर गांव को नानकवास ग्राम पंचायत में शामिल करना गलत है। दोनों गांवों की दूरी ज्यादा है। दोनों के बीच मांढण पंचायत भी लगती है। मालाखेड़ा पंचायत समिति पुनर्गठन के बाद नव सृजित बंदीपुरा ग्राम पंचायत बनाने का सोहनपुर व धोलापलाश गांवों के लोगों ने विरोध किया है।
Published on:
01 Aug 2019 06:00 am
