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गंगानगरी गुलाब व कलकत्ती गैंदे से किसान निहाल

जिले में गंगानगरी गुलाब और कलकत्ती गैंदा के फूल शादी विवाह के मण्डपों में ही नहीं, बल्कि किसानों के घरों में खुशहाली बिखेर रहे हैं। परम्परागत खेती के बजाय किसान अब गुलाब, गैदा व गुलदाउदी की खेती कर लागत से 10 गुना तक मुनाफा कमा रहे हैं।
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अलवर

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Prem Pathak

Nov 25, 2019

गंगानगरी गुलाब व कलकत्ती गैंदे से किसान निहाल

गंगानगरी गुलाब व कलकत्ती गैंदे से किसान निहाल

अलवर. जिले में गंगानगरी गुलाब और कलकत्ती गैंदा के फूल शादी विवाह के मण्डपों में ही नहीं, बल्कि किसानों के घरों में खुशहाली बिखेर रहे हैं। परम्परागत खेती के बजाय किसान अब गुलाब, गैदा व गुलदाउदी की खेती कर लागत से 10 गुना तक मुनाफा कमा रहे हैं।

फूलों की खेती में लागत कम आती है और मुनाफा दस गुना तक मिल जाता है। वहीं फूलों की मांग भी बाजार में सदैव बनी रहती है। अलवर जिले में फिलहाल किसान हाइब्रिड गैंदा, कलकत्ती गैंदा, गंगानगरी गुलाब, डच रोज, हाइब्रिड गुलाब, गुलदाउदी जैसे फूलों की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। इन दिनों उमैरण क्षेत्र में गैंदे की खेती का रकबा बढ़ा है। मालाखेड़ा क्षेत्र के बिजवार नरुका व आसपास के अन्य गांवों में गैंदे की फसल दिखाई देने लगी है।

यह है फूलों की खेती का गणित

एक बीघा गैंदे की खेती में करीब 20 हजार रुपए की लागत आती है और किसान को एक से डेढ़ लाख रुपए तक आमदनी होती है। इसी प्रकार एक बीघा गुलाब की खेती पर करीब 50 हजार रुपए खर्चा आता है और साल में एक से डेढ़ लाख रुपए तक मुनाफा होता है। गैंदा की पैदावार करीब 6 महीने और गुलाब की दो से तीन साल तक पैदावार होती है। इस कारण फूलों की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बन गया है।

जिले में बढ़ रहा बागवानी का रकबा

जिले में गैंदे की फसल का रकबा 200 से 250 हैक्टेयर तक पहुंच गया है, वहीं गुलाब का रकबा करीब 50 हैक्टेयर तक पहुंच गया है। हालांकि गुलदाउदी की फसल भी जिले में होती है, लेकिन इसका रकबा अभी कम है। इसके अलावा डच रोज की खेती भी जिले में अब होने लगी है।

उमरैण, मालाखेड़ा क्षेत्र में बागवानी ज्यादा

अलवर के समीपवर्ती उमरैण, मालाखेड़ा क्षेत्र में बागवानी की फसल ज्यादा होने लगी है। इनमें उमरैण, बिजवार नरुका, हल्दीना, ढाईपैड़ी क्षेत्र में गैंदा, गुलाब की खेती खूब होने लगी है। इसके अलावा साहोडी, पृत्थीपुरा, माचडी, पलखड़ी, सोता का बास, लिली, भाखेड़ा, लिवारी में भी किसान बागवानी अपनाने लगे हैं।

बागवानी पर सरकार देती है सहायता

बागवानी पर किसानों को सरकार की ओर से भी सहायता मिलती है। यह मुख्यमंत्री की 10 प्राथमिकताओं में ऊपर है। फूलों की खेती में मुनाफा अधिक है और इसकी मांग भी सदैव बनी रहती है।

मुकेश चौधरी

कृषि अधिकारी उद्यान अलवर

किसानों का कहना है

हजारे की खेती करने से उनका गुजारा हो जाता है, अगस्त में इनकी बुवाई होती है। बाजरा-ग्वार बोने से इतनी आय नहीं होती है जितनी बागवानी की खेती से होती है।

खिलाड़ी सैनी, माली बास बिजवार नरुका

बागवानी से दोहरा लाभ लिया जा सकता है जिसमें हजारे की खेती के बाद गेहूं की बुवाई भी की जाती है। गुलाब के फूल दीपावली पर 80 रुपए से लेकर 125 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक जाते हैं, वही शादी विवाह के समय गुलाब के फूल 40 रुपए प्रति किलो दर तक बिकते हैं।

सतीश सैनी, माली बास बिजवार नरुका

पिछले कुछ समय से उमरैण क्षेत्र में गैंदे की खेती बढ़ी है। फूलों की खेती में लागत कम और मुनाफा 5 से 10 गुना तक मिल जाता है। फूलों की खेती में फंगस के अलावा रोग भी ज्यादा नहीं लगता। इस कारण बागवानी किसानों की खुशहाली का कारण बनने लगी है। फिलहाल जिले में गैंदा, गुलाब, गुलदाउदी के फूलों की खेती हो रही है।

मानसिंह सैनी, उमरैण