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अलवर में आज 2500 दवा दुकानें पूरी तरह बंद, यह है बड़ी वजह

ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने और नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ आज बुधवार को अलवर जिले के सभी दवा व्यापारी हड़ताल पर हैं। अखिल भारतीय कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर जिले की करीब 2500 दवा दुकानें पूरी तरह बंद हैं।

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शहर में बंद मेडिकल स्टोर (फोटो - पत्रिका)

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध सहित अन्य मांगों को लेकर बुधवार को अलवर में मेडिकल दुकानें बंद रहीं। केमिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने की मांग उठाई। व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे मेडिकल स्टोर प्रभावित हो रहे हैं और बिना उचित जांच के दवाएं मिलने से मरीजों के स्वास्थ्य पर भी खतरा बढ़ रहा है। बंद के कारण लोगों को दवाएं खरीदने में परेशानी का सामना करना पड़ा। व्यापारियों ने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए सख्त नियम लागू करने की मांग की।

इस हड़ताल का नेतृत्व राजस्थान कैमिस्ट एलायंस के प्रदेशाध्यक्ष अरविंद गुप्ता कर रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी बंद के समर्थन में अलवर जिले के करीब 2500 दवा विक्रेता अपने शटर डाउन रखकर इस कारोबार बंद में शामिल हैं। दवा व्यापारियों की यह नाराजगी बढ़ती ऑनलाइन फार्मेसी और कॉरपोरेट कंपनियों के खिलाफ है।

पारंपरिक दवा दुकानदारों का व्यापार पूरी तरह चौपट

अलवर जिला कैमिस्ट एसोसिएशन के महासचिव सुरेश कुकरेजा ने इस बंद की वजह साफ करते हुए बताया कि इंटरनेट पर बिना किसी सख्त डॉक्टर पर्ची के धड़ल्ले से बेची जा रही ऑनलाइन दवाओं पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बेचने वाली बड़ी कॉरपोरेट कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए दवाओं पर भारी-भरकम छूट (डिस्काउंट) देती हैं, जिससे छोटे और पारंपरिक दवा दुकानदारों का व्यापार पूरी तरह चौपट हो रहा है।

यह अनुचित व्यापारिक मुकाबला छोटे व्यापारियों के पेट पर लात मारने जैसा है। इसके अलावा, दवा एसोसिएशन ने बाजार में तेजी से पैर पसार रहे नकली दवाओं के काले कारोबार पर भी गहरी चिंता जताई है। उनकी मांग है कि सरकार और प्रशासन को नकली दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन पर सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम जनता और मरीजों की सेहत के साथ जानलेवा खिलवाड़ है।

व्यापारियों का कहना है कि वे लंबे समय से इन जायज मांगों को लेकर सरकार के सामने अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन जब कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूरन उन्हें एक दिन के लिए अपना कारोबार बंद करना पड़ा। इस बंद के चलते अलवर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक में दवाइयों की किल्लत देखी जा सकती है। दवा विक्रेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।