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शहरवासियों की एक ही चाहत, समस्या मुक्त हो अलवर

पांच साल पहले नगर परिषद चुनाव के दौरान शहरवासियों ने स्वच्छ और विकसित अलवर का सपना संजोया था, नगर परिषद के पूर्ववर्ती बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने तक लोगों के न सपने पूरे हो पाए और न ही शहर के विकास की सोच ही दिखाई पाई।
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अलवर

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Prem Pathak

Dec 03, 2019

शहरवासियों की एक ही चाहत, समस्या मुक्त हो अलवर

शहरवासियों की एक ही चाहत, समस्या मुक्त हो अलवर

अलवर. पांच साल पहले नगर परिषद चुनाव के दौरान शहरवासियों ने स्वच्छ और विकसित अलवर का सपना संजोया था, नगर परिषद के पूर्ववर्ती बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने तक लोगों के न सपने पूरे हो पाए और न ही शहर के विकास की सोच ही दिखाई पाई। शहरवासियों की चाहत है कि अब बोर्ड में पक्ष व विपक्ष के सभी पार्षद मिलकर शहर के विकास एवं गंदगी, रोडलाइट, लावारिस पशुओं की समस्या का अंत करें।

शहर के विकास की सोच जरूरी

पुराने बोर्ड के न सपने थे और न ही वह अलवर शहर के लिए कुछ कर पाया। पूरे पांच साल लोग गंदगी, रोडलाइट, कचरा, लावारिश पशुओं, अतिक्रमण की समस्या से त्रस्त रहे। अंधेर नगरी चौपट राजा का राज रहा। अलवर में पटरी पार एक नया शहर विकसित करने की जरूरत है।
अजय अग्रवाल

पूर्व सभापति, नगर परिषद अलवर

स्वच्छता अभियान भाजपा के घोषणा पत्र का हिस्सा है, लेकिन नगर परिषद का पिछला बोर्ड अपनी ही पार्टी और सरकार के इस अभियान को अलवर में सफल तरीके से मूर्तरूप नहीं दे पाया। शहर में लावारिस पशुओं से लोगों के घायल होने की समस्या पूरे कार्यकाल रही। सफाई ठेकों में भाइ-भतीजावाद व भ्रष्टाचार पनपता रहा।
प्रदीप आर्य

पूर्व चेयरमैन, नगर विकास न्यास अलवर

शहर की व्यवस्था को सुधारना है तो आप सबसे पहले सफाई पर ध्यान दें। कूड़े का निस्तारण आवश्यक है। शहर में सीवरेज व्यवस्था और रोड लाइट को सही करना होगा। कहीं कनेक्शन हुए तो कहीं नहीं हुए हैं। पूरे शहर का प्लानिंग से विकास करें तो बेहतर होगा।

- निकुंज सांघी, ऑटो डीलर व्यवसायी।

पुराने बोर्ड का ज्यादातर कार्यकाल पार्षदों की आपसी खींचतान में ही बीत गया। पुराने शहर में जरूरत के हिसाब से पार्क विकसित नहीं हो पाए। पॉलीथिन, डिस्पोजल के कचरे पर रोक के इंतजाम नहीं दिखे। लेकिन शहर में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था, घर-घर कचरा संग्रहण के लिए ऑटो टिप्पर की व्यवस्था सार्थक प्रयास रहे हैं।

लोकेश खंडेलवाल पर्यावरण व वन्यजीव प्रेमी अलवर

पिछले वर्षों में नगर परिषद में कभी भी प्लानिंग से काम नहीं हुआ है। इसके कारण शहर में अव्यवस्था हो गई। हर तरफ गंदगी है। अब नए बोर्ड को प्लानिंग से काम करना चाहिए।

-अंशुल गोयल, अध्यक्ष, लॉयन्स क्लब, अलवर रॉयल्स।

नगर परिषद का विवादों से गहरा नाता रहा है। वर्तमान में अलवर शहर को साफ और स्वच्छ बनाने में हम सभी की भागीदारी आवश्यक है। सभी को समन्वित प्रयास करने चाहिए। नगर परिषद को चाहिए कि वह पूरे शहर में बिना भेदभाव सफाई करवाए।

- राकेश अरोड़ा, जिलाध्यक्ष, पुरुषार्थी समिति, अलवर।

देश भर में स्वच्छता अभियान चल रहा है। अलवर की पहचान अब गंदगी से होने लगी है। नगर परिषद बोर्ड को सफाई पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए जिससे गंदगी पूरी तरह समाप्त हो। सभापति निष्पक्ष होकर काम करें तो परिणाम सामने आएंगे।

- इन्दर कुमार तौलानी, समाजसेवी।

नगर परिषद को निर्धारित समय अवधि के अनुसार कार्य योजना बनानी होगी। वार्ड समितियों का गठन हो। शहर में ऐसे स्थान चिह्नित किए जाए, जहां फूड जोन बनाया जा सके। सभापति दलीय राजनीति से ऊपर उठकर सकारात्मक विजन से काम करें तो अलवर में परिवर्तन नजर आएगा।

-अमित गोयल, अध्यक्ष, अग्रवाल महासभा, अलवर।

अलवर शहर पूरे जिले का आइना है। रेलवे जंक्शन और बस स्टैंड के सामने से अतिक्रमण हटवाएं और सफाई रखे। इस काम में सभी को योगदान करना होगा। प्रशासन और नगर परिषद समन्वित प्रयास करें।

- राजेश भारद्वाज, शिक्षाविद्।

इस समय सबसे अधिक परेशानी गंदगी और अतिक्रमण से है। अलवर शहर इंदौर की तरह स्वच्छ हो, इसके लिए कार्य योजना बनानी चाहिए।

- हरमीत सिंह मेहंदीरत्ता, प्रधान, गुरुद्वारा लाजपत नगर।

अलवर में जगह-जगह सडक़ों पर आवारा पशु विचरते हैं। इन्हें पकड़ कर बाहर भेजा जाए। इनके मालिकों के खिलाफ कार्रवाई हो। जब तक सडक़ों पर पशु घूमते रहेंगे तो दुर्घटना होती रहेंगी।

-कपिल खंडेलवाल, अलवर।

शहर में रोड लाइट की हालत सभापति को सुधारनी चाहिए। रात को एक भी रोड लाइट नहीं जलती। नए बोर्ड को पहले रोड लाइट को सुधारना चाहिए।

-संजू राघव, गृहिणी।

शहर में महिलाओं के साथ छेड़छाड बढ़ती जा रही है। महिलाओं व बालिकाओं के खिलाफ साइबर क्राइम बढ़ रहा है। निरक्षर व हिंसा पीडि़त महिलाओं को जागरुक किया जाए।
अनिता सोनी, प्राचार्य, जैन शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय, अलवर।

शहर की ऐतिहासिक धरोहरों को साफ सुधरा रखने की जिम्मेदारी नगर परिषद की है। सभापति को इस पर ध्यान देना चाहिए।

सुनीता मित्तल, कंवीनर, भारतीय सांस्कृतिक निधि
शहर की आधी आबादी इस समय टॉयलेट नहीं बनने से परेशान हैं। बाजारों में महिला टॉयलेटस की सुविधा नहीं है। यूआईटी के साथ सामंजस्य बैठाकर काम करने से अच्छे परिणाम आएंगे।

अरुणा देवडा, अध्यक्ष, एक प्रयास संस्था