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Alwar: शहरी सरकार की सियासत में महिलाओं का दबदबा, सत्ता के साथ चलता रहा निकाय

अलवर की शहरी सरकार में लंबे समय से महिलाओं का दबदबा रहा है। नगर परिषद से नगर निगम तक कई अहम मौकों पर महिला नेताओं ने कमान संभाली। अब आगामी नगर निगम चुनाव में भी महापौर पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित है, जिससे अलवर की राजनीति में महिला नेतृत्व की परंपरा एक बार फिर आगे बढ़ेगी।
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अलवर

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Rajendra Banjara

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Updated: 30 Aug 2026, 12:44 PM IST

alwar nagar nigam election

alwar nagar nigam

शहरी सरकार में महिलाओं का दबदबा रहा है। चाहे नगर परिषद हो या नगर निगम लंबे समय तक कमान महिलाओं के हाथ में रही है। दिलचस्प संयोग यह रहा कि निगम में जिस पार्टी का बोर्ड बना, प्रदेश में सत्ता भी उसी पार्टी के हाथ में रही। वर्ष 1999 में कांग्रेस का बोर्ड बना और उस समय राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी। वर्ष 2004 में भाजपा का बोर्ड बना, तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। वर्ष 2014 में भी भाजपा का बोर्ड बना और उस समय राजस्थान में भाजपा की सरकार थी।

सिर्फ 2009 और 2019 में बदला राजनीतिक समीकरण

वर्ष 2009 और 2019 में राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन अलवर नगर निकाय की कमान भाजपा के हाथ में रही। वर्ष 2009 में हर्षपाल कौर तत्कालीन नगर परिषद की सभापति बनीं। इसके बाद 2019 में कांग्रेस सरकार के समय भाजपा का बोर्ड बना, लेकिन क्रॉस वोटिंग की वजह से महापौर की कुर्सी पर कांग्रेस की बीना गुप्ता बैठीं। हालांकि इस पद भाजपा सरकार के आने से पहले ही भाजपा के उप सभापति घनश्याम गुर्जर महापौर बन चुके थे।

इस बार फिर महिलाओं के हाथ में होगी कमान

अब अलवर नगर निगम चुनाव में एक बार फिर निगम की कमान महिलाओं के हाथ में रहने वाली है। इस बार महापौर की सीट अनारक्षित महिला के खाते में जाएगी। ऐसे में यहां के राजनीतिक इतिहास में महिला नेतृत्व की परंपरा एक बार फिर आगे बढ़ने जा रही है। अब देखना होगा कि इस बार दोनों प्रमुख राजनीतिक दल किस महिला चेहरे पर दांव लगाते हैं और क्या नगर निगम का अगला बोर्ड भी प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी के साथ रहने का पुराना आंकड़ा कायम रखता है या फिर बदलता है।


इस तरह महिलाएं बनीं सभापति

  • वर्ष 1999 में मीना सैनी नगर परिषद की सभापति बनीं। कुछ वर्षों तक पद पर रहने के बाद सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया। इसके बाद शकुंतला सोनी ने कार्यवाहक सभापति के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
  • वर्ष 2009 में एक बार फिर सभापति का पद महिला के लिए आरक्षित हुआ और हर्षपाल कौर सभापति चुनी गईं। सरकार ने उन्हें भी पद से हटा दिया। इसके बाद कमलेश सैनी और फिर सुनीता खाम्बरा ने कार्यवाहक सभापति के रूप में कमान संभाली।
  • वर्ष 2019 में हुए चुनाव में कांग्रेस की बीना गुप्ता सभापति बनीं। इस तरह 1999 से अब तक निकाय के इतिहास में कई महत्वपूर्ण मौकों पर महिला नेतृत्व सामने आया।