5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अलवर नगर परिषद : इन्होंने पार्षदों पर लगाए मोटे पैसे में बिकने का आरोप, मचा हडक़ंप

अलवर नगर परिषद में अविश्वास प्रस्ताव मामले में तीन पार्षदों ने अन्य पार्षदों पर पैसे में बिकने के आरोप लगाए हैं।
2 min read
Google source verification

अलवर

image

Hiren Joshi

Jan 14, 2019

Alwar Nagar Parishad Councillors Put Allegation Of Bribe

अलवर नगर परिषद : इन्होंने पार्षदों पर लगाए मोटे पैसे में बिकने का आरोप, मचा हडक़ंप

नगर परिषद सभापति व उप सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले पार्षदों की बाड़ाबंदी बिखरने के बाद अब एकजुटता भी ढेर होती दिख रही है।

निर्दलीय पार्षद अजय पूनिया, धर्मेन्द्र मीना व सुधीर यादव ने को पत्रकारों से बातचीत में जिला कलक्टर की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाने के अलावा कुछ पार्षदों के मोटे पैसे में बिकने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बोर्ड की बैठक किए जाने की सूचना विधायक व सांसद को नहीं दी गई, जो कि निर्वाचित सदस्य माने गए हैं। यदि अविश्वास प्रस्ताव पास होता है तो इस आधार पर भी सभापति कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। ऐसा दौसा में हो चुका है। दौसा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद इसी आधार पर हटाए गए वहां के सभापति ने कोर्ट की शरण ली तो उनको कोर्ट ने राहत भी दी।

पार्षद पूनिया ने यह भी कहा कि प्रशासन व नगर परिषद के पास कानूनी जानकारी रखने वाले अधिकारी बैठे हैं। उनको दौसा के प्रकरण को ध्यान में रखते हुए सांसद व विधायक को भी बैठक से सात दिन पहले सूचना भेजकर सुनिश्चित करनी जरूरी थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जानबूझकर इस तरह की कमियां छोडऩे का मतलब यही है कि कांग्रेस के कुछ नेता भी भाजपा के साथ मिल गए हैं। तभी तो प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जानबूझकर इस तरह की खामियां छोड़ी गई है। पूनिया ने यह भी कहा कि पार्षदों को सात दिन पहले नोटिस भेजकर तामिल सुनिश्चित करनी चाहिए था। जिसके लिए जिला कलक्टर ने नगर परिषद आयुक्त को 14 जनवरी तक सभी पार्षदों की नोटिस तामिली करने को लिखा। इसके बाद सात दिन का समय देकर बैठक की तारीख तय होनी थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

हालांकि 25 मई 2017 के संशोधित एक्ट में यह लिखा है कि नगर परिषद के निर्वाचित पार्षदों को सात दिन पहले रजिस्टर्ड डाक से सूचना भेजी जाए। पूनिया ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर 40 पार्षदों के हस्ताक्षर हैं। मौजूदा सभापति के प्रति वे विश्वास खो चुके हैं। जिसके कारण अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। अब कुछ दिनों से शहर से गायब हैं। इसका मतलब यही है कि उनकी खरीद-फरोख्त हो गई।