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निकाय चुनाव: बीजेपी और कांग्रेस नेताओं की परीक्षा

निकाय चुनाव में कांग्रेस व भाजपा के बड़े नेता भले ही भाग्य नहीं आजमा रहे हो, लेकिन दोनों ही दलों के प्रमुख नेताओं के लिए ये चुनाव बड़ी परीक्षा साबित होंगे।
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अलवर

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Prem Pathak

Nov 06, 2019

निकाय चुनाव: बीजेपी और कांग्रेस नेताओं की परीक्षा

निकाय चुनाव: बीजेपी और कांग्रेस नेताओं की परीक्षा

अलवर. निकाय चुनाव में कांग्रेस व भाजपा के बड़े नेता भले ही भाग्य नहीं आजमा रहे हो, लेकिन दोनों ही दलों के प्रमुख नेताओं के लिए ये चुनाव बड़ी परीक्षा साबित होंगे। दोनों ही दलों ने अलवर जिले के तीनों निकायों की जिम्मेदारी अलग-अलग नेताओं को सौंपी है। पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बिठा प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करना इन बड़े नेताओं की असल परीक्षा होगी।
निकाय चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का कार्य पूरा होने के साथ ही भाजपा व कांग्रेस अब जीत की रणनीति बनाने में जुट गए हैं, लेकिन दोनों ही दलों की राह आसान नहीं है। टिकट वितरण में नेताओं के बीच रस्साकसी के चलते दोनों ही पार्टियों के चुनावी समीकरण कुछ गड़बड़ाने की आशंका है।

कार्यकर्ताओं के बगावती तेवर बिगाड़ सकते हैं गणित

टिकट वितरण से असंतुष्ट कई दावेदारों की ओर से अपने ही दलों के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय व अन्य दलों से चुनाव में उतरने से भाजपा व कांग्रेस नेताओं की मुश्किल बढ़ी हैं। कार्यकर्ताओं के ये बगावती तेवर दोनों ही दलों का चुनावी गणित बिगाड़ सकते हैं। दोनों ही पार्टियां प्रत्याशी चयन व नामांकन का कार्य पूरा होने के बाद अब वार्ड स्तर पर बगावत की टोह लेने में जुट गई हैं।

टिकट वितरण में भारी रहे नेताओं की परीक्षा अब

निकाय चुनाव के टिकट वितरण में भाजपा व कांग्रेस के कई नेता अन्य पदाधिकारी व नेताओं पर भारी पड़े। ऐसे नेता अपने समर्थकों को टिकट दिला पाने के साथ ही दूसरे नेताओं के समर्थकों के टिकट कटवाने में भी कामयाब रहे। टिकट वितरण में भारी पड़े नेताओं की परीक्षा अब पार्षद के चुनाव में होनी है। टिकट दिलवाने में कामयाब रहे नेताओं की चिंता अब अपने समर्थक प्रत्याशियों को जीत दिलाने की है। चुनाव परिणाम विपरीत रहने पर ऐसे नेताओं की प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है।

बोर्ड बनाने में अपने ही खड़े कर सकते हैं मुश्किलें

भाजपा व कांग्रेस का लक्ष्य अलवर व भिवाड़ी नगर परिषद व नवगठित थानागाजी नगर पालिका में बोर्ड बनाना है, लेकिन बोर्ड गठन में अपने ही इन दलों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। टिकट वितरण में कई नेता अपने समर्थकों को टिकट दिलवाने में कामयाब तो रहे, लेकिन बोर्ड गठन के दौरान इन समर्थकों को एकजुट रख पाना आसान नहीं है। कारण है कि पार्षद व सभापति चुनाव के गणित अलग-अलग रहे हैं। सभापति चुनाव में पार्टी स्तर पर कोई रणनीति तय होती है और कई दलीय पार्षद इस रणनीति में खुद को फिट नहीं पाते। इस कारण कई बार बोर्ड गठन में अपनों की मुश्किलें भी झेलनी पड़ती है।

अलवर व भिवाड़ी में प्रतिष्ठा दांव पर

निकाय चुनाव में अलवर व भिवाड़ी नगर परिषद चुनाव में भाजपा व कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। साथ ही दोनों ही जगह चुनाव की कमान संभाल रहे व टिकट वितरण में अग्रणी रहे नेताओं के लिए अपने-अपने दलों के बोर्ड बनवाना बड़ी चुनौती है। ऐसे नेताओं में कांग्रेस के मंत्री से लेकर संगठन पदाधिकारी व भाजपा में विधायक, नगर परिषद सभापति से लेकर संगठन पदाधिकारियों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।