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तब नगर पालिका चेयरमैन ने मंत्रियों के घर लगे सफाईकर्मियों को दिए थे हटाने के आदेश

नगर पालिका अलवर में वर्ष 1945 में लाला काशीराम गुप्ता को पहले अध्यक्ष चुना गया।
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अलवर

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Prem Pathak

Nov 14, 2019

तब नगर पालिका चेयरमैन ने मंत्रियों के घर लगे सफाईकर्मियों को दिए थे हटाने के आदेश

तब नगर पालिका चेयरमैन ने मंत्रियों के घर लगे सफाईकर्मियों को दिए थे हटाने के आदेश

अलवर. नगर पालिका अलवर में वर्ष 1945 में लाला काशीराम गुप्ता को पहले अध्यक्ष चुना गया। यद्यपि उनका कार्यकाल छोटा रहा, लेकिन नगर निकाय के इतिहास में चर्चित रहा। इसका कारण रहा कि उन्होंने अध्यक्ष बनने के बाद सबसे पहले पूर्व राजशाही शासन के प्रधानमंत्री के घर लगे 4 सफाईकर्मियों व गृहमंत्री और अन्य मंत्रियों के यहां सफाई करने जाने वाले दो कर्मचारियों को आदेश किया कि वे नगर पालिका में ही कार्य करेंगे। मंत्रियों के घर सफाई कार्य करने पर मंत्रियों के बजट से ही उनको वेतन मिल सकेगा।

अलवर के इतिहास के जानकार एडवोकेट हरिशंकर गोयल बताते हैं कि मंत्रियों के घर सफाई कार्य करने वाले कर्मचारियों का वेतन उनके बजट से उठाने की बात बोर्ड के अधिकारियों ने सुनी तो वे घबरा गए और अलवर के तत्कालीन शासक व पूर्व महाराज तेजसिंह की सरकार (22 जुलाई 1937 से 6 फरवरी 1948) के मंत्रियों के खिलाफ यह कदम उठाने पर विचार होने लगा। नगर पालिका अध्यक्ष लाला काशीराम गुप्ता ने इस पर अपना आदेश जारी कर दिया। बाद में तत्कालीन प्रधानमंत्री बापना ने इस पर परिषद के अध्यक्ष को बुलाकर सम्बन्धित मंत्री के सहयोग से अध्यक्ष की आज्ञा को रद्द कर दिया।

महिला सफाई कर्मियों के कार्य करने की परम्परा को सुधारा

उस दौरान वाइसराय लार्ड वेवल अलवर आने वाले थे, तब पूर्व राजशाही ने सारे दुकानदारों को बाजार की सफेदी और रंग सजावट अपने खर्चे पर करने के निर्देश दिए। तब नगर पालिका अध्यक्ष गुप्ता और बोर्ड सदस्यों ने कहा कि यह कार्य दवाब से नहीं होगा, इसके लिए दुकानदारों से प्रस्ताव लें तभी यह संभव हो पाएगा। उसी दौरान पालिका चेयरमैन सफाई कर्मचारियों को अपनी बात कहने के लिए बुलाने लगे। उस समय पुरुष सफाई कर्मचारी अपनी औरतों को काम करने भेज देते थे। लाला काशीराम ने इस परम्परा को सुधारा। इस कारण पालिका अध्यक्ष गुप्ता के पूर्व राजशाही प्रशासनिक अधिकारियों से मतभेद बढ़ते गए।

पूर्व राजशाही ने अध्यक्ष पद से हटाया

खेडा मंगलसिंह में आंदोलन में भाग लेने और गिरफ्तारी देने, अलवर शहर में 8 दिन हड़ताल रहने के बाद सभी को रिहा कर दिया गया, लेकिन इस एक्ट की विशेष धारा का प्रयोग कर लाला काशीराम को पूर्व राजशाही ने अध्यक्ष पद से हटा दिया। बाद में जिलाधीश अलवर को 25 अप्रेल 1946 से 7 जून 1946 तक अध्यक्ष बनाया। इसके बाद लाला पृथ्वीनाथ भार्गव की अध्यक्षता में एक बोर्ड का निर्माण हुआ, जिसमें लक्ष्मण स्वरूप त्रिपाठी को बोर्ड का वाइस प्रेसीडेंट बनाया गया। वशीर अहमद को कार्यवाहक अध्यक्ष, रामचंद्र व्यास को नगर परिषद चेयरमैन (गैर सरकारी अध्यक्ष) बनाया गया। योगेश चंद कटोरीवाला 18 अक्टूबर 1947 से 17 जून 1948 तक कार्यवाहक अध्यक्ष तथा जिलाधीश ख्ेामचंद माथुर 17 जून 48 से 2 मार्च 49 तक नगर पालिका के अध्यक्ष रहे।