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alwar nikay election news निकाय चुनाव: चेयरमैन का आरक्षण तय होते ही राजनीति में आने लगा उबाल

alwar nikay election news नगर निकायों में चेयरमैन सीट का आरक्षण तय होते ही जिले की राजनीति उबाल खाने लगी है। इस बार अलवर नगर परिषद समेत जिले की पांच नगर निकायों में चेयरमैन सीट सामान्य खाते में जाने से चुनावी मुकाबला रोचक होने के आसार हैं।
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अलवर

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Prem Pathak

Oct 22, 2019

alwar nikay election news निकाय चुनाव: चेयरमैन का आरक्षण तय होते ही राजनीति में आने लगा उबाल

alwar nikay election news निकाय चुनाव: चेयरमैन का आरक्षण तय होते ही राजनीति में आने लगा उबाल

अलवर. alwar nikay election news नगर निकायों में चेयरमैन सीट का आरक्षण तय होते ही जिले की राजनीति उबाल खाने लगी है। इस बार अलवर नगर परिषद समेत जिले की पांच नगर निकायों में चेयरमैन सीट सामान्य खाते में जाने से चुनावी मुकाबला रोचक होने के आसार हैं। निकायों में वार्ड आरक्षण व निकाय प्रमुख आरक्षण का काम पूरा हो चुका है, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से अभी तक निकाय चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं करने से प्रमुख दल अपनी-अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप नहीं दे सके हैं।

प्रदेश मुख्यालय जयपुर में रविवार को लॉटरी के जरिये निकाय प्रमुखों का आरक्षण तय होने के साथ ही निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। राजनीतिक पार्टियों ने भी निकाय चुनाव के लिए रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। इस बार जिन निकायों में चेयरमैन सीट सामान्य खाते में गई हैं, वहां चुनावी संघर्ष अन्य आरक्षित निकायों से ज्यादा होने की उम्मीद है।

सबसे रोचक मुकाबला अलवर व भिवाड़ी में

जिले में इस बार नगर परिषद अलवर व भिवाड़ी में रोचक चुनावी मुकाबला होने के आसार हैं। दोनों निकाय प्रमुख सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित हुई है, इस कारण राजनीतिक पार्टियों के साथ ही कई अन्य दावेदारों की निगाह भी चेयरमैन की सीट पर लगी है। प्रमुख दलों के वे नेता चेयरमैन का चुनाव लडऩे को ज्यादा उत्सुक हैं, जो कि अपने-अपने दलों से विधानसभा व लोकसभा चुनाव टिकट के अभाव में नहीं लड़ पाए थे। खासकर भाजपा में ऐसे उत्सुक दावेदारों की संख्या ज्यादा है, कारण है कि आगामी चार साल तक विधानसभा व लोकसभा चुनाव नहीं है, ऐसे में निकाय प्रमुख का चुनाव जीत राजनीति में जगह बरकरार रखना संभव हो सकेगा। हालांकि कांग्रेस में भी सभापति चुनाव लडऩे की कतार में कई नेता हैं, लेकिन प्रदेश में सरकार होने से कुछ नेता निकाय चुनाव के फेर में पडऩे के बजाय निगम व बोर्ड आदि में मनोनयन को बेहतर मान रहे हैं।

थानागाजी को लेकर भी नेताओं में उत्सुकता

जिले में नव गठित थानागाजी नगर पालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर प्रमुख दलों में खासी उत्सुकता है। इसका कारण है कि थानागाजी में पहली बार नगर पालिका के चुनाव हो रहे हैं। इस कारण कांग्रेस व भाजपा में पालिका अध्यक्ष का चुनाव लडऩे वालों की लंबी कतार है। थानागाजी नगर पालिका में अध्यक्ष पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। इस कारण क्षेत्र के ओबीसी नेता चुनाव का ताना बाना बुनने लगे हैं।

फिलहाल चुनाव तीन निकायों में, बाकी में उत्साह ठंडा

जिले में सभी नगर निकाय प्रमुखों के लिए आरक्षण तय हो चुका है, लेकिन फिलहाल उत्साह अलवर, भिवाड़ी नगर परिषद सभापति व थानागाजी नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव को लेकर है। जिले के शेष नगर निकायों में चुनाव अगले साल होने से वहां भी चुनाव को लेकर अभी उत्साह ठंडा है। हालांकि ऐसे निकाय क्षेत्रों में अध्यक्ष पद को लेकर चुनावी चर्चा जरूर शुरू हो गई हैं।

नए फार्मूले से पार्टियां भी रणनीति बदलने को मजबूर

राज्य सरकार की ओर से इस बार निकाय चुनाव में चेयरमैन चुने जाने के लिए पार्षद का चुनाव जीतने की बाध्यता खत्म कर देने से निकाय चुनाव में घमासान और बढ़ा दिया है। प्रदेश में अध्यक्षीय प्रणाली से निकाय प्रमुख चुने जाने के कारण राजनीतिक दलों के अलावा गैर राजनीतिक क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में चेयरमैन पद की दावेदारी होने की उम्मीद है। इससे निकाय चुनाव का घमासान और बढऩे के आसार हैं।