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चुनाव परिणाम तय करेगा प्रमुख दलों के नेताओं का भविष्य

नगर निकाय के चुनाव भले ही स्थानीय स्तर के हों, लेकिन इन चुनाव परिणाम का असर राजनीति में दूर तक जाएगा। अलवर, भिवाड़ी व थानागाजी निकाय चुनाव परिणाम पर कांग्रेस के पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह, श्रम राज्य मंत्री टीकाराम जूली, विधायक संदीप यादव व कांति मीणा तथा भाजपा में सांसद महंत बालकनाथ योगी, शहर विधायक संजय शर्मा, जिलाध्यक्ष संजय नरूका सहित अन्य नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
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अलवर

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Prem Pathak

Nov 16, 2019

चुनाव परिणाम तय करेगा प्रमुख दलों के नेताओं का भविष्य

चुनाव परिणाम तय करेगा प्रमुख दलों के नेताओं का भविष्य

अलवर. नगर निकाय के चुनाव भले ही स्थानीय स्तर के हों, लेकिन इन चुनाव परिणाम का असर राजनीति में दूर तक जाएगा। अलवर, भिवाड़ी व थानागाजी निकाय चुनाव परिणाम पर कांग्रेस के पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह, श्रम राज्य मंत्री टीकाराम जूली, विधायक संदीप यादव व कांति मीणा तथा भाजपा में सांसद महंत बालकनाथ योगी, शहर विधायक संजय शर्मा, जिलाध्यक्ष संजय नरूका सहित अन्य नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।

नगर निकाय के प्रथम चरण के तहत अलवर जिले में अलवर व भिवाड़ी नगर परिषद और नव गठित थानागाजी नगर पालिका के लिए शनिवार को वोट डाले जाएंगे। वैसे तो इन चुनाव परिणाम से अलवर, भिवाड़ी व थानागाजी में शहर की सरकार तय होगी, लेकिन तीनों निकायों के चुनाव परिणाम कांग्रेस व भाजपा के कई बड़े नेताओं का भविष्य तय करने वाले भी साबित होंगे।

कांग्रेस के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हैं ये चुनाव

निकाय चुनाव राजनीति के क्षेत्र में इस कारण ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि लोकसभा चुनाव के बाद जिले में यह पहला चुनाव है। तीन निकाय क्षेत्रों में दो में वर्तमान में कांग्रेस व कांग्रेस समर्थित विधायक हैं। इनमें भिवाड़ी में कांग्रेस में पिछले दिनों ही शामिल हुए संदीप यादव, थानागाजी में कांग्रेस समर्थित निर्दलीय विधायक कांति मीणा शामिल हैं। वहीं श्रम राज्य मंत्री का प्रवास ज्यादातर अलवर में रहता है इस कारण अलवर नगर परिषद क्षेत्र का जिम्मा भी उन पर है। साथ ही पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह का अलवर में निवास है और वे अलवर से पूर्व में विधायक व सांसद भी रह चुके हैं। इस कारण अलवर निकाय के चुनाव परिणाम से उनकी प्रतिष्ठा भी जुड़ी है।

यदि तीनों निकायों में कांग्रेस को अच्छी जीत मिलती है और बोर्ड बनते हैं तो पंचायत चुनाव व अन्य चुनाव में भी कांग्रेस के अवसर बढऩा तय है, लेकिन परिणाम विपरीत रहने पर कांग्रेस की चिंता बढ़ सकती है। कारण है कि विधानसभा चुनाव में तीनों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को जीत नहीं मिल पाई थी। बाद में थानागाजी में निर्दलीय विधायक कांति मीणा ने कांग्रेस को समर्थन दिया और भिवाड़ी में तिजारा से बसपा से जीते विधायक संदीप यादव पिछले दिनों कांग्रेस में शामिल हुए थे।

पांच साल रहा भाजपा का बोर्ड

अलवर व भिवाड़ी में पिछले पांच सालों में भाजपा का बोर्ड था, इस कारण निकाय चुनाव में कांग्रेस के लिए भाजपा बोर्ड की विफलता गिना अपनी राह सरल करने का मौका है। वहीं गत अलवर लोकसभा उप चुनाव में भी अलवर श्हार व तिजारा विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को अच्छी बढ़त मिली थी। इस बढ़त का कारण भी उपचुनाव में अलवर व भिवाड़ी में स्थानीय मुद्दे हावी होना ही रहा।

भाजपा के लिए इस कारण महत्वपूर्ण हैं निकाय चुनाव

निकाय चुनाव भाजपा के लिए भी महत्वूर्ण है। इसका कारण है कि पिछले महीनों हुए लोकसभा चुनाव में अलवर व भिवाड़ी में भाजपा को अच्छी बढ़त मिली थी। लोकसभा चुनाव के बाद जिले में यह पहला चुनाव है, इस कारण अपनी बढ़त को बरकरार रख पाने में भाजपा कितनी सफल रही, यह भी निकाय चुनाव के परिणाम तय करेंगे।

सांसद व विधायक की प्रतिष्ठा जुड़ी

अलवर सांसद महंत बालकनाथ योगी व शहर विधायक संजय शर्मा, जिलाध्यक्ष संजय नरूका आदि नेताओं की प्रतिष्ठा भी इन निकाय चुनाव के परिणाम से जुड़ी है। अलवर जिले में सांसद बालकनाथ की स्वच्छ छवि व उनकी निकाय चुनाव में सक्रियता रहने से राजनीतिक क्षेत्र में सांसद से बड़ी उम्मीद हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में महंत बालकनाथ ने अलवर संसदीय क्षेत्र से बड़ी जीत हासिल की है। वहीं शहर विधायक संजय शर्मा की छवि भी स्वच्छ रही है और संगठन में सक्रियता के चलते भी लोग निकाय चुनाव को उनकी प्रतिष्ठा से जोडकऱ देख रहे हैं। गत विधानसभा चुनाव में भी शर्मा ने अलवर शहर से अच्छे मतों से जीत दर्ज कराई थी। वहीं जिलाध्यक्ष संजय नरूका भी संगठन क्षमता भी निकाय चुनाव के परिणाम से तय होनी है। भाजपा संगठन में ज्यादा खींचतान भी नहीं रही। वहीं निकाय चुनाव में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का भाजपा को परोक्ष रूप से बैक अप भी मिला है। इस कारण निकाय चुनाव में भाजपा के परिणाम पर ज्यादातर लोगों की नजरें टिकी हैं।