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अलवर में 4 साइबर ठग गिरफ्तार, सोशल मीडिया पर फर्जी ऑफर देकर करते थे ठगी 

अलवर में पुलिस ने साइबर ठगों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' के तहत पुलिस ने कमीशन लेकर ठगों को बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट उपलब्ध कराने वाले चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक बाल अपचारी को निरुद्ध किया गया है।

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आजकल डिजिटल दुनिया में जितनी सहूलियतें हैं, उतने ही खतरे भी बढ़ गए हैं। इसी खतरे पर लगाम कसने के लिए अलवर पुलिस इन दिनों एक्शन मोड में है। पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ 'ऑपरेशन म्यूल हंटर' और 'साइबर संग्राम अभियान 2.0' चला रखा है। इसी अभियान के तहत पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए चार ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो साइबर ठगों को कमीशन पर अपने बैंक खाते, गूगल पे और फोन पे जैसी सुविधाएं मुहैया कराते थे।

पुलिस ने इनके पास से 9 मोबाइल और सिम कार्ड बरामद किए हैं। इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ करने के लिए पुलिस ने अलग-अलग थानों में 6 मामले दर्ज किए हैं और आगे की जांच शुरू कर दी है।

कैसे जाल बिछाते थे ये ठग?

अलवर के पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने बताया कि यह कार्रवाई गोविंदगढ़, बड़ौदामेव, शिवाजी पार्क, नौगांवा और कोतवाली थाना पुलिस की संयुक्त टीमों ने मिलकर की है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस्ताक खान (निवासी मीना का बास), कुनाल झालानी (निवासी विजय मंदिर रोड), कुनाल नारनोलिया (निवासी शिवाजी पार्क) और असकरून (निवासी रघुनाथगढ़ कॉलोनी) के रूप में हुई है।

इन बदमाशों का ठगी करने का तरीका बेहद शातिर था। ये लोग सोशल मीडिया पर बड़ी-बड़ी कंपनियों के होलसेल डीलर बनकर फर्जी विज्ञापन डालते थे। लोगों को लालच देने के लिए ये कहते थे कि मात्र 550 रुपए में ब्रांडेड लैपटॉप मिल रहा है। इतने सस्ते लैपटॉप के चक्कर में लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते थे।

फर्जी नौकरी का ऑफर

इसके अलावा यह गैंग लोगों को घर बैठे कमाई करने का झांसा भी देता था। नटराज कंपनी में 'पेंसिल पैकिंग' की फर्जी नौकरी का ऑफर देकर ये बेरोजगार युवाओं से रजिस्ट्रेशन और एडवांस फीस के नाम पर हजारों रुपए ऐंठ लेते थे। इतना ही नहीं, पुराने सिक्के और नोटों को महंगे दामों में खरीदने का लालच देकर भी इन्होंने कई लोगों को अपना शिकार बनाया।

जैसे ही कोई पीड़ित इनके झांसे में आकर पैसे ट्रांसफर करता, ये आरोपी उस रकम को तुरंत कमीशन पर लिए गए बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर कर देते थे। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि असली मास्टरमाइंड और मुख्य अपराधियों की पहचान छुपी रहे और पुलिस उन तक न पहुंच सके।

इस कार्रवाई के बाद अलवर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले किसी भी लुभावने ऑफर, संदिग्ध कॉल, अनजान लिंक या लॉटरी के विज्ञापनों पर आंख बंद करके भरोसा न करें। अगर आपके साथ या आपके किसी परिचित के साथ कोई साइबर ठगी हो जाती है, तो बिल्कुल न घबराएं। तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या ऑनलाइन अपनी शिकायत दर्ज करें। इसके अलावा आप अलवर पुलिस के विशेष हेल्पलाइन नंबर 8764874306 पर भी संपर्क कर सकते हैं।

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