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अलवर पुलिस कंट्रोल रूम पर फोन कर शिकायत कर रहे, साहब, भैंस दूध नहीं दे रही कुछ करो

अलवर पुलिस कंट्रोल रूम पर लोग फोन कर शिकात कर रहे हैं कि साहब हमारी भैंस दूध नहीं दे रही है, बच्चा रो रहा है कुछ करो।
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अलवर

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Prem Pathak

Jun 15, 2018

Alwar police control room : silly complaints on police control room

अलवर पुलिस कंट्रोल रूम पर फोन कर शिकायत कर रहे, साहब, भैंस दूध नहीं दे रही कुछ करो

अलवर. साहब, हमारी भैंस दूध नहीं दे रही। बच्चा रो रहा है। कुछ करो। अंकल हमारा रीचार्ज खत्म हो गया है। प्लीज दस रुपए का रीचार्ज करा दो। आमजन की सुविधा व आपराधिक घटनाओं की त्वरित सूचना के लिए पुलिस की ओर से गठित कंट्रोल रूम इन दिनों लोगों के मनोरंजन का केन्द्र बन गया है। कंट्रोल रूम पर रोजाना इस तरह के सैंकड़ों कॉल्स आते हैं।

वहीं, रूम पर तैनात पुलिसकर्मियों की मजबूरी यह है कि उन्हें यह फोन उठाने पड़ते हैं। जाने कौन सा फोन काम का हो। किसे कब पुलिस की मदद की जरूरत पड़ जाए। कई बार तो कंट्रोल रूम के नम्बर शराबी भी डायल कर देते हैं। वे फोन उठाते ही बदसलूकी पर उतर आते हैं। पुलिसकर्मियों को उन्हें भी सहना पड़ता है। वे उन्हेंं समझा बुझाकर तो कभी धमका कर शांत करते हैं।

नगर परिषद के फोन भी करते है परेशान

कंट्रोल रूम पर तैनात पुलिसकर्मियों ने बताया कि कंट्रोल रूम का सौ नम्बर सबके पास होने से कई बार लोग नगर परिषद से जुड़ी समस्या भी उन्हें बता देते हैं। वे कहते हैं कि उनकी गली में जानवर मरा पड़ा है। नगर परिषद को फोन कर उसे उठवा दो। कई बार बच्चे कॉल कर देते है और बोलते कुछ नहीं। बार-बार पूछने पर वे कहते हैं कि पुलिस अंकल बोल रहे हैं। जब उनसे कहा जाता है कि हां। तो वे कहते हैं कि कुछ नहीं, वैसे ही फोन कर लिया।

कंट्रोल रूम की उपयोगिता समझें

पुलिसकर्मियों के अनुसार आमजन को पुलिस कंट्रोल रूम की उपयोगिता समझनी चाहिए। बच्चों की शरारत व फिजूल के फोनों से कई बार जरूरतमंद को समय पर मदद नहीं मिल पाती। जिसका पुलिस व जरूरतमंद के परिजनों को जिन्दगीभर पछतावा रहता है।

रह जाते हैं कई बार जरुरत के फोन

बच्चों की शरारत व फिजूल के फोनों से कई बार जरूरत के फोन उठने से रह जाते हैं। पुलिसकर्मियों के अनुसार कंट्रोल रूम पर दस फोन हैं, जबकि इन्हें अटैंड करने वाला स्टाफ अपेक्षाकृत कम हैं। ऐसे में कई बार एक-एक पुलिसकर्मी को दो-दो फोन एक साथ उठाने पड़ते हैं। इसके बावजूद कई फोन बजते रहते हैं। बच्चों की शरारत व फिजूल के फोन करने वालों के फोन नहीं काटने व लगातार बात करने से कई बार जरूरत के फोन बज-बजकर बंद हो जाते हैं। इससे पुलिस को अहम सूचना व जरूरम मंदों को मदद से महरूम रहना पड़ जाता है।

जो भी सुविधाएं आमजनता को मुहैया कराई जाती हैं। वे करदाताओं की खून-पसीने की कमाई से कराई जाती है। उनका उपयोग आवश्यकतानुसार ही किया जाना चाहिए।
राहुल प्रकाश, जिला पुलिस अधीक्षक अलवर।