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Alwar: अब कैसी दिखेगी ‘अक्शु की मुस्कान’, टॉफी चबाते ही मुंह फटा, 100 टांके आए, 3 साल की मासूम को टाफी देने वाला गिरफ्तार

Alwar News: एक तीन साल की बच्ची, जो ठीक से बोलना भी नहीं जानती, आज अस्पताल के आईसीयू में पट्टियों में लिपटी हुई है।

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अलवर

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Jayant Sharma

Feb 05, 2026

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राजस्थान के अलवर जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। रामगढ़ पुलिस ने उस आरोपी दुकानदार सुदील उर्फ काला को गिरफ्तार कर लिया है, जिस पर एक तीन साल की मासूम बच्ची को टॉफी की जगह जानलेवा विस्फोटक (बारूद) देने का आरोप है। पुलिस और एफएसएल (FSL) की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटा लिए हैं, वहीं मासूम अक्शु जिंदगी और मौत के बीच जंग जीतकर अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से कराह रही है।

क्या थी पूरी घटना ?

घटना सोमवार सुबह करीब 11 बजे अलवर मार्ग स्थित चौकी बास गांव की है। तीन साल की नन्ही अक्शु अपनी छह साल की बड़ी बहन अहाना के साथ बड़े चाव से टॉफी खरीदने दुकान पर गई थी। उसे क्या पता था कि जिस टॉफी को वह खुशी-खुशी मांग रही है, वह उसकी मुस्कान छीन लेगी। आरोप है कि दुकानदार सुदील ने अक्शु को टॉफी की शक्ल में बारूद से भरी एक विस्फोटक वस्तु थमा दी। जैसे ही मासूम ने उस 'मौत की टॉफी' को मुंह में रखकर चबाने की कोशिश की, एक जोरदार धमाका हुआ। धमाका इतना भीषण था कि अक्शु का चेहरा लहूलुहान हो गया, उसके होंठ और गाल के चिथड़े उड़ गए।

100 से ज्यादा टांके और एक अधूरा बचपन

मासूम अक्शु को तुरंत अलवर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर जयंत थरेजा ने बताया कि बच्ची की हालत अत्यंत गंभीर थी। उसके चेहरे की त्वचा और मांसपेशियां बुरी तरह फट चुकी थीं। डॉक्टरों की टीम ने घंटों चले जटिल ऑपरेशन के बाद बच्ची की जान तो बचा ली, लेकिन उसके चेहरे पर 100 से ज्यादा टांके आए हैं। विस्फोट इतना गहरा था कि मासूम का चेहरा विकृत हो गया है, जिसे ठीक होने में लंबा समय लगेगा।

दुकानदार की सफाई और पुलिस की जांच

गिरफ्तारी के बाद आरोपी दुकानदार सुदील खुद को बचाने के लिए कहानी गढ़ रहा है। उसका दावा है कि बच्ची हाथ में कांच की कोल्ड ड्रिंक की बोतल लेकर गिर गई थी, जिससे उसे चोट आई। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शी बड़ी बहन अहाना और एफएसएल की शुरुआती जांच कुछ और ही बयां कर रही है। पुलिस अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह और डीएसपी पिंटू कुमार ने स्पष्ट किया है कि एक्सपर्ट्स की राय और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। एक तीन साल की बच्ची, जो ठीक से बोलना भी नहीं जानती, आज अस्पताल के आईसीयू में पट्टियों में लिपटी हुई है।