
डेढ़ दशक से सरकारों का छलावा झेल रही अलवर की जनता, नहीं मिल रही सुविधा
अलवर. बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन छोटे अस्पतालों में सुविधाओं के विस्तार के नाम पर छलावा किया जा रहा है। अलवर की जनता भी पिछले डेढ़ दशक से सरकारों के ऐसे ही छलावे का शिकार है। जिला मुख्यालय स्थित जनाना अस्पताल की एक विंग में गीतानंद शिशु चिकित्सालय का बोर्ड तो लगा दिया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में ये आज भी वार्ड है।
जनाना अस्पताल परिसर में यूआईटी की ओर से शिशु वार्ड के लिए बिल्ंिडग तैयार की गई जिसमें ओपीडी यूनिट और रैन बसेरे के निर्माण के लिए कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं भामाशाह नंदलाल ने करीब 35 लाख रुपए दिए। इसके बाद नंदलाल एवं उनकी पत्नी गीता के नाम पर शिशु वार्ड पर गीतानंद शिशु अस्पताल का बोर्ड लगा दिया गया जिसका लोकार्पण 10 सितम्बर 2003 को कांग्रेस की तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने किया। विगत डेढ़ दशक में भाजपा व कांग्रेस की सरकारें आती-जाती रही, लेकिन कोई भी गीतानंद शिशु वार्ड को अस्पताल का दर्जा दिला सकी।
24 घंटे नहीं रहते चिकित्सक
शिशु वार्ड का दर्जा होने के कारण गीतानंद शिशु अस्पताल में 24 घंटे शिशु चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं रहते हैं। कहने को तो जनाना अस्पताल में 10 शिशु चिकित्सक हैं, लेकिन शिशु वार्ड को अस्पताल का दर्जा नहीं मिलने के कारण चिकित्सकों की दिन-रात ड्यूटी नहीं लगती है। ना ही इमरजेंसी में कोई चिकित्सक बैठता है। नर्सिंग स्टाफ व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी कम हैं। अस्पताल का दर्जा मिलने पर यहां बच्चों की लैब, एक्स-रे, ईसीजी, ब्लड की जांच हो सकेगी। साथ ही आईसीयू सुविधाओं का भी विस्तार हो सकेगा।
एमसीएस में नहीं महिला चिकित्सक
करीब ढाई साल पहले जनाना अस्पताल में मदर एण्ड चाइल्ड सेंटर (एमसीएस) का लोकार्पण किया गया। करीब दस माह पहले स्वास्थ्य विभाग की ओर से यहां 12 नए महिला चिकित्सकों के पद जनाना अस्पताल में दिन और रात की ड्यूटी में महिला विशेषज्ञ चिकित्सक रहेंगी। इसके अलावा इंमरजेंसी कॉल ड्यूटी पर भी उन्हें बुलाया जा सकेगा।
तो फिर कैसे खोलेंगे मेडिकल कॉलेज
सरकार अलवर की जनता को 800 करोड़ रुपए के मेडिकल कॉलेज का सपना दिखा रही है। हालातों को देखते हुए ये सपना धरातल पर साकार होता नहीं दिख रहा है। सरकार वर्तमान में चल रहे सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं एवं संसाधन नहीं जुटा पा रही है तथा ना ही उन्हें अपग्रेड कर रही है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज के लिए इतना लम्बा-चौड़ा तामझाम और स्टाफ पूर्ति करना मुश्किल होगा।
नहीं मिला दर्जा
गीतानंद शिशु चिकित्सालय का अस्पताल का दर्जा नहीं मिला है। रिकॉर्ड में आज भी ये शिशु वार्ड है। शिशु वार्ड को अस्पताल का दर्जा मिलने पर यहां शिशु चिकित्सा सुविधाओं और संसाधनों का विस्तार हो सकेगा। वहीं, मदर एण्ड चाइल्ड सेंटर के लिए 12 महिला चिकित्सक एवं 28 नर्सिंग स्टाफ के पद स्वीकृत किए गए थे। इनमें से एक भी चिकित्सक नहीं लगाया गया है। नर्सिंग स्टाफ चार-पांच यहां है बाकि इधर-उधर ड्यूटी दे रहा है। जिनका वेतन यहीं से उठ रहा है।
डॉ. श्याम बिहारी झारेड़ा, कार्यवाहक पीएमओ, अलवर।
Published on:
08 Aug 2018 04:46 pm
