
राजकीय संप्रेक्षण एवं किशोर गृह (फोटो - पत्रिका)
कहते हैं कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं, लेकिन समाज की कड़वी सच्चाई यह भी है कि कई मासूमों को पैदा होते ही लावारिस छोड़ दिया जाता है। ऐसे बच्चों के लिए अलवर का शिशु गृह सहारा बना है। राहत की बात यह है कि देश ही नहीं, बल्कि विदेशी परिवार भी इन बच्चों को, खासकर 'स्पेशल नीड्स' (विशेष आवश्यकता वाले) बच्चों को पूरे दिल से अपना रहे हैं। ये परिवार न केवल इन बच्चों को माता-पिता का प्यार दे रहे हैं, बल्कि उन्हें एक बेहतर भविष्य और इलाज भी मुहैया करा रहे हैं।
अलवर शिशु गृह में रह रही एक ऐसी ही मासूम बच्ची की कहानी आंखें नम कर देने वाली है। जन्म के तुरंत बाद उसे लावारिस छोड़ दिया गया था। उस दौरान लगी गंभीर चोट की वजह से उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। काफी कोशिशों और एम्स (AIIMS) में इलाज के बाद भी उसकी आंख ठीक नहीं हो सकी। स्पेशल नीड्स वाली इस बच्ची को गोद लेने के लिए शुरुआत में किसी भारतीय परिवार ने दिलचस्पी नहीं दिखाई।
लेकिन अब इस बच्ची की जिंदगी बदलने वाली है। अमरीका की एक अविवाहित महिला (सिंगल मदर) ने इस बच्ची को गोद लेने के लिए आवेदन किया है। फिलहाल विभागीय स्तर पर एनओसी (NOC) मिलने का इंतजार है, जिसके बाद गोद लेने की बाकी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।
यह पहली बार नहीं है जब अलवर से कोई बच्चा सात समंदर पार जा रहा है। इससे पहले साल 2016 और 2018 में स्पेशल नीड्स वाली दो बच्चियों को इटली के परिवारों ने गोद लिया था। वहीं, साल 2022 में भी एक दिव्यांग बालक को अमरीका के एक परिवार ने अपनाया था।
आपको बता दें कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और सुरक्षित होती है। भारत सरकार की संस्था 'कारा' (केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण - CARA) के कड़े नियमों के तहत ही इन बच्चों का 'इंटर-कंट्री अडॉप्शन' (अंतरराष्ट्रीय गोद लेना) किया जाता है।
शिशु गृह के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में अलवर में तीन और नवजात बच्चियां लावारिस हालत में मिली हैं। ये मासूम बच्चियां 12 मई, 28 मई और 25 जून को अलग-अलग जगहों पर छोड़ी गई थीं। फिलहाल शिशु गृह में चार छोटे बच्चे रह रहे हैं। नियमानुसार, ऐसे बच्चों को पहले बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाता है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने और बच्चे को 'लीगली फ्री फॉर अडॉप्शन' घोषित किए जाने के बाद ही उन्हें किसी को गोद दिया जा सकता है।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने में विदेशी आगे आ रहे हैं, भारतीय कम आवेदन करते हैं। हम पूरी प्रक्रिया अपनाने के बाद बच्चों को गोद दे रहे हैं - संजय वर्मा, अधीक्षक, राजकीय संप्रेक्षण एवं किशोर गृह (अलवर
Updated on:
30 Jun 2026, 12:28 PM IST
Published on:
30 Jun 2026, 12:28 PM IST
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