
40 लाख आबादी वाले जिले में नहीं है शिशु अस्पताल,नवजात के लिए सिर्फ 12 घंटे इमरजेंसी, बाकी राम हवाले
राजकीय शिशु वार्ड में पहले थे छह डॉक्टर अब हैं नौ, फिर भी रात में इलाज की सुविधा नही
अलवर ञ्च पत्रिका. चालीस लाख से ज्यादा आबादी वाले अलवर जिले के जिला मुख्यालय पर रात के समय नवजात को आपातकालीन इलाज की कोई सुविधा नहीं है। यानि जिला मुख्यालय पर ही नवजात के लिए 12 इमरजेंसी सुविधा है और शेष 12 घंटे नवजात का आपातकालीन इलाज राम हवाले हैं। हालत यह है कि प्रदेश के प्रमुख जिलों में शुमार होने के बाद भी यहां सरकारी शिशु अस्पताल नहीं है।
सामान्य चिकित्सालय के शिशु वार्ड में आउट डोर व भर्ती की सुविधा है। इसी वार्ड में कुछ समय पहले इमरजेंसी सुविधा शुरू की गई थी। लेकिन वह केवल रात 8 बजे तक खुलती है। रात में इलाज के लिए लोगों को निजी अस्पतालों के भरोसे रहना पड़ता है। कई बार स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी इमरजेंसी सेवा 24 घंटे शुरू करने के आदेश दे चुके हैं, लेकिन आज तक उन आदेशों की पालना नहीं हुई। अलवर में मेवात, नगर, डीग, दौसा सहित आसपास के जिलों से मरीज इलाज के लिए आते हैं। इस कारण सामान्य अस्पताल में मरीजों का खासा दबाव रहता है। शिशु वार्ड में ही ओपीडी चलती है। प्रतिदिन 250 से 300 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। गम्भीर मरीजों को इलाज के लिए ओपीडी समय के बाद सामान्य अस्पताल में जाना पड़ता था। उसमें खासा समय लगता था। इस दौरान कई बार बच्चों की मौत भी हो गई। शिशु वार्ड में इलाज की गहराती समस्या को देख स्वास्थ्य विभाग ने वार्ड परिसर में इमरजेंसी सेवा शुरू की। इसमें पांच बेड व अन्य उपकरण लगाए गए। डॉक्टरों ने इसका खासा विरोध किया था। उस समय अस्पताल में छह डॉक्टर थे। इमरजेंसी शुरू होने के बाद दिन के समय तो लोगों को खासा फायदा हुआ, लेकिन रात में आने वाले मरीजों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय से कई बार रात में भी इमरजेंसी सेवा शुरू करने के आदेश मिल चुके हैं। लेकिन अब तक अस्पताल प्रशासन ने आदेश की पालना नहीं की है। वार्ड में अब 9 शिशु रोग विशेषज्ञ हैं। ऐसे में रात में भी इमरजेंसी शुरू हो सकती है।
स्टाफ की अभी कमी है, इसलिए रात में इमरजेंसी सेवा शुरू नहीं हो पाई है। डॉक्टर व स्टाफ बढ़ते ही रात में भी इसकी व्यवस्था की जाएगी।
डॉ. भगवान सहाय, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, अलवर
Published on:
02 Jul 2018 04:02 pm
