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Alwar Train Suicide : “जिंदगी से जी भर गया, तू भी साथ मरेगा क्या”, जानिए हादसे की पूरी कहानी, वहां मौजूद राहुल की जुबानी

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अलवर

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Hiren Joshi

Nov 22, 2018

Alwar Train Suicide : Whole Suicide Story Of 4 Boys Of Alwar

Alwar Train Suicide : "जिंदगी से जी भर गया, तू भी साथ मरेगा क्या", जानिए हादसे की पूरी कहानी, वहां मौजूद राहुल की जुबानी

हंसी मजाक करते हुए सत्यनारायण बोला, यार अब तो जीने से धाप गए हैं। हम सब तो मरेंगे, तू भी मरना चाहता है तो बता। मैंने कहा भाई मैं क्यों मरूंं, अगर मैं मर गया तो मेरे घरवाले मर जाएंगे।

अलवर. ट्रेन की टक्कर के बाद तीन दोस्तों की मौत का दर्दनाक मंजर देखने वाला राहुल अब भी सहमा हुआ है। राहुल ने वह सब बताया जो उसने देखा। मंगलवार शाम 6.30 बजे मालवीय नगर निवासी राहुल के फोन की घंटी बजी। दोस्त सत्यनारायण उर्फ डूटी का फोन था। उसने एफसीआई गोदाम के समीप बुलाया। कोई जरूरी काम बताकर जल्दी आने को कहा तो मैं पैदल ही 15 मिनट में उसके पास जा पंहुचा। गोदाम के पास पटरियों पर सत्यनारायण बैठा था। उसके साथ दोस्त मनोज, अभिषेक, ऋतुराज और संतोष रेलवे पटरियों पर बैठकर सिगरेट पी रहे थे। इसी दौरान हंसी मजाक करते हुए सत्यनारायण बोला, यार अब तो जीने से तंग आ गए हैं। हम सब तो मरेंगे, तू भी मरना चाहता है तो बता। मैंने कहा मैं क्यों मरूं, मेरे घरवाले क्या करेंगे। सत्यनारायण बोला, देख नौकरी लगेगी नहीं और खेतों में काम हमसे होगा नहीं तो जी कर क्या करेंगे, दूसरों को तकलीफ ही देंगे।

मैंने सत्यनारायण से बोला कि ये फालतू के ख्याल दिमाग से निकाल दो। मैंने कहा, भाई सुबह से कुछ नहीं खाया है चलो कमरे पर चलते हैं खाना खाएंगे। इतने में सत्यनारायण बोला कि अपने पास एटीएम और पैसे हैं, आधे घंटे रुक होटल पर खाना खाएंगे। इसके बाद हम सभी आपस में हंसी-मजाक करने लगे। फिर सभी दूसरे ट्रैक पर जाकर बैठ गए। अचानक सत्यनारायण दोस्त मनोज, अभिषेक, ऋतुराज और संतोष से बोला कि अब मरना है... सभी अपने घरों पर तो बात कर लो। फिर वह चारों इधर-उधर फोन मिलाकर बात करने लग गए। इतने में ही सामने से जयपुर-चण्डीगढ़ ट्रेन आई.... मैं कुछ समझ पता इससे पहले ही चारों ने ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। पलक झपकते ही उनके चीथड़े उड़ गए।

मैं और संतोष अचानक समझ ही नहीं पाए कि क्या हुआ है? ट्रैक पर अंधेरे में कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। अचानक घबराकर हम दोनों वहां से भाग आए। मैं सत्यनारायण के कमरे पर गया और उसके भाई सुरेंद्र को सूचना दी। वहां से अभिषेक के भाई और कुछ अन्य दोस्तों को भी सूचना दी और सब मिलकर ट्रैक पर वापस आए। वहां से घायल अभिषेक को अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को सूचित किया।

ट्रेन से टकराए और उड़ गए चिथड़े

हादसा इतना वीभत्स था कि ट्रेन से टकराते ही मनोज और सत्यनारायण के शव करीब 500 दूर तक चले गए। दोनों के शवों के चिथड़े उड़ गए। ऋतुराज ट्रेन की चपेट से ट्रैक से दूर जाकर गिरा, जिससे उसकी भी मौत हो गई। वहीं, अभिषेक ट्रेन की टक्कर से दूर जाकर गिरा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। रात के अंधेरे में पुलिस, जीआरपी व आरपीएफ के जवानों ने मनोज व सत्यनारायण के मांस के लोथड़ों को चादर में बांधकर
ले जाना पड़ा।

नौकरी नहीं मिल रही थी

दूसरा चश्मदीद संतोष मीणा बोला कि दिन में वह और मनोज मीणा साथ थे। दोनों ने दोपहर 1.30 बजे उसके कमरे पर साथ में खाना खाया था। उसने बताया कि मनोज नौकरी नहीं मिलने को लेकर चर्चा करता था। वह हाल ही में दिल्ली पुलिस की भर्ती में मामूली अंकों से रह गया था। जबकि अन्य सभी भी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। मंगलवार शाम को मैं भी मनोज, सत्यनारायण, ऋतुराज, अभिषेक और राहुल के साथ रेलवे ट्रैक पर बैठा हुआ था। सिगरेट पीते हुए आपस में बातचीत कर रहे थे। ऋतुराज मरने की बात भी कर रहा था। वे चारों फोन पर बात करते हुए चारों आगे चले गए। सामने से ट्रेन आते ही उसके आगे कूद गए।