
representative picture (AI)
तेजी से विकसित हो रहा अलवर किस तरह से औद्योगिक और शैक्षणिक बदलावों का ही नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी गवाह बन रहा है, इसे लेकर अलवर की दिव्या चौहान ने अपनी साथी प्रो. मोनिका कानन के साथ मिलकर एक शोध किया है। प्रो. मोनिका अजमेर के सोफिया कॉलेज में भूगोल विषय की विभागाध्यक्ष हैं। शोध में पाया गया कि शहर की उच्च शिक्षित और नौकरीपेशा महिलाओं में छोटे परिवारों की प्रवृत्ति बढ़ी है।
अधिकतर महिलाओं ने एक या दो बच्चों तक ही परिवार को सीमित रखा है। कम शिक्षित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों में तीन या उससे अधिक बच्चों वाले परिवार अपेक्षाकृत अधिक पाए गए। अध्ययन के अनुसार, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिलाएं विवाह और मातृत्व का निर्णय अपेक्षाकृत काफी देरी से ले रही हैं तथा परिवार नियोजन के प्रति अधिक जागरूक हैं। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच रखने वाले परिवारों में भी जन्मदर अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई।
इस अध्ययन में शहर की 200 से अधिक महिलाओं का फील्ड सर्वे किया गया। विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों को शामिल कर शिक्षा, आय, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और प्रजनन व्यवहार के बीच संबंधों का विश्लेषण किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति लंबे समय तक जारी रही, तो आने वाले वर्षों में शहर की जनसंख्या संरचना, श्रमबल और सामाजिक आवश्यकताओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
उच्च शिक्षित और नौकरीपेशा महिलाओं का सर्वे हसन खान मेवात नगर, स्कीम-10ए, मनु मार्ग, स्कीम-8, मालवीय नगर, सूर्य नगर, अंसल टाउन और बुद्ध विहार में किया गया।
निम्न आय वर्ग की महिलाओं का सर्वे धोबी गट्टा, साहब जोड़ा, अकाहपुरा, कबीर कॉलोनी, खड़ाना मोहल्ला, चूड़ी मार्केट और लोहिया का तिबारा जैसे क्षेत्रों से शामिल किया गया।
अध्ययन में सामने आया कि मालवीय नगर, मनु मार्ग, अंसल टाउन, सूर्य नगर में अधिकतर परिवार एक या दो बच्चों तक सीमित हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर बस्तियों में बड़े परिवारों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि उच्च शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के कारण महिलाओं की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। अब बड़ी संख्या में महिलाएं पहले शिक्षा और कॅरियर को प्राथमिकता दे रही हैं और उसके बाद परिवार विस्तार का निर्णय ले रही हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण का सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसके साथ संतुलित जनसंख्या विकास की नीति भी जरूरी होगी।
शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि सरकार को केवल जनसंख्या वृद्धि या नियंत्रण तक सीमित रहने के बजाय 'संतुलित जनसंख्या विकास' की नीति पर काम करना चाहिए। महिला शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार के अवसर और परिवार नियोजन कार्यक्रमों को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाने से भविष्य में सामाजिक और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।
Updated on:
19 Jul 2026 11:27 am
Published on:
19 Jul 2026 11:27 am
