
पर्यटन के मामले में अलवर का राजस्थान में है उच्च स्थान, लेकिन प्रशासन ही पर्यटकों को आने से रोक रहा, जानिए कैसे
अलवर. देश की राजधानी दिल्ली व राजस्थान की राजधानी जयपुर के बीच होने के कारण अलवर पर्यटकों की पहली पसंद में शामिल हैं। यहां तक पहुंचने के लिए सडक़ मार्ग व रेलमार्ग की व्यवस्था बहुत अच्छी है। अलवर जिले में प्राचीन किले, पुरानी हवेलियां, ऐतिहासिक इमारतें, प्राचीन बावडियों के साथ ही यहां पर बड़ी संख्या में धार्मिक स्थल हैं। जहां पर आस्था के चलते साल भर पर्यटकों का आना लगा रहता है।
अरावली की पहाडियों व सरिस्का के जंगलों की वजह से हर तरफ हरियाली नजर आती हैं। यहां की प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को हर समय आकर्षित करती हैं। इसलिए साल भर यहां पर्यटकों का आना जाना रहता है। पर्यटन एक ऐसा क्षेत्र हैं जहां पर रोजगार की भी बड़ी संभावनाएं हैं। लेकिन इतना होने के बाद भी यहां का आकर पर्यटक मायूस हो जाते हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त सुवधिाएं नहीं मिलती हैं।
पर्यटन स्वागत केंद्र की किसी ने नहीं ली सुध
अलवर. जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से गुरुवार को विश्व पर्यटन दिवस मनाया गया। शहर की मुख्य इमारतों पर रंग बिरंगी रोशनी की गई उन्हें सजाया गया । लेकिन अलवर के रेलवे स्टेशन के समीप स्थित पर्यटन स्वागत केंद्र की किसी ने सुध नहीं ली। एेसे में पर्यटन दिवस महज एक औपचारिकता तक सिमट गया । पर्यटन स्वागत केंद्र पर लगा लैंडलाइन फोन पिछले काफी समय से बंद हैं। यदि अलवर के पर्यटन स्थलों के बारे में किसी पर्यटक को कोई जानकारी चाहिए तो यहां आने पर ही कुछ होना संभव है।
पर्यटन केंद्र के बाहर के हालात इतने खराब है कि यहां आकर पर्यटक बीमार भी हो सकते हैं। पिछले एक माह से यहां पर सडक़ निर्माण कार्य चल रहा है जो आज तक पूरा नहीं हुआ है । इसके चलते यहां पर हर समय धूल मिटटी उड़ती रहती हैं। पर्यटन केंद्र के बाहर नाले में सफाई नहीं होने के कारण यहां पर कचरा ऊपर तक तैर रहा है। इतना ही नहीं यहां पर केंद्र के मुख्य द्वार पर ही पेड़ का एक मोटा तना पिछले काफी समय से पड़ा हुआ है उसे भी नहीं हटाया गया है। पर्यटन स्वागत केंद्र पर पिछले काफी समय से कर्मचारियों का अभाव है इसके चलते पर्यटन दिवस जैसे आयोजनों पर काफी परेशानी उठानी पड़ती हैं।
ये है प्रमुख पर्यटक स्थल
अलवर में फतेहजंग गुंबद, कंपनी बाग, होपसर्कस, सिटी पैलेस, मूसी महारानी की छतरी, सागर जलाशय, राजकीय संग्रहालय, जयसमंद, सिलिसेढ़, बाला किला, तालवृक्ष, भर्तृहरि, सरिस्का, नीलकंठ, अजबगढ़ - भानगढ़, पांडूपोल।
Published on:
28 Sept 2018 04:49 pm
