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राजस्थान विधानसभा चुनावों में मात्र साढ़े चार माह, अब दोनों प्रमुख दल कर रहे यह काम, जानिए आप भी

राजस्थान विधानसभा चुनावों में अब कुछ समय ही शेष है, इसके लिए दोनों दल तगड़े दावेदारों की राह देख रहे हैं।
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अलवर

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Prem Pathak

Jul 19, 2018

BJP and congress making their stratagy for upcoming assembly elections

राजस्थान विधानसभा चुनावों में मात्र साढ़े चार माह, अब दोनों प्रमुख दल कर रहे यह काम, जानिए आप भी

अलवर. राज्य विधानसभा चुनाव समीप आने के साथ ही राजनीतिक दलों की उलझने बढऩे लगी है। फिलहाल दोनों प्रमुख दलों की बड़ी परेशानी प्रत्याशी चयन को लेकर है। जिले के आधे से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस व भाजपा को मजबूत प्रत्याशी की तलाश करनी पड़ सकती है।

विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। हालांकि चुनावी रणनीति को लेकर अभी ऊपरी स्तर पर चर्चा हो रही है, लेकिन स्थानीय नेताओं में भी चिंता कम नहीं है। जिले में कांग्रेस व भाजपा के लिए आगामी विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण है। एक दशक से भाजपा विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर कांग्रेस से बाजी मारती रही है। वहीं इस बार गत दो विधानसभा चुनावों का प्रदर्शन दोहरा पाना भाजपा के लिए आसान नहीं है। इसी कारण भाजपा के रणनीतिकार जिले की एक-एक विधानसभा क्षेत्र के लिए चुनावी गणित बिठाने में जुटे हैं। वहीं सत्ता की आस पूरी करने के लिए कांग्रेस का अलवर जिले में बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी है। इसी समस्या का उपाय ढूंढऩे के प्रयास में कांगे्रस के रणनीतिकार जुटे हैं।

...तो कई हो जाएंगे टिकट पार

विधानसभा चुनाव को लेकर हालांकि प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से अभी स्पष्ट गाइड लाइन तय नहीं की गई है, लेकिन अंदरखाने चर्चा है कि दोनों ही दल इस बार टिकट वितरण के लिए कुछ विशेष फार्मूला लागू करने के प्रयास में है। इसमें कांग्रेस में लगातार दो बार चुनाव हारने वालों को टिकट नहीं देने एवं पिछला विधानसभा चुनाव 30 हजार से ज्यादा मतों से हारने वाले प्रत्याशियों को टिकट नहीं देने की चर्चा शामिल है। यदि यह फार्मूला लागू हुआ तो आगामी विधानसभा चुनाव में जिले के आधी से ज्यादा सीटों पर पार्टी के चेहरे बदले दिखाई पड़ सकते हैं। हालांकि भाजपा में अभी ऐसे किसी फार्मूले की चर्चा सुनाई नहीं पड़ सकी है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी पार्टी की बड़ी समस्या हो सकती है।

आधा जिला दोनों दलों की बड़ी समस्या

कांग्रेस एवं भाजपा के लिए आधा जिला बड़ा समस्या है। यानि जिले के 11 विधानसभा क्षेत्रों में से 5-6 सीट ऐसी हैं, जहां दोनों ही दलों को मजबूत प्रत्याशी तलाश जरूरी है। इसमें कांग्रेस की समस्या ज्यादा है। जिले के किशनगढ़बास, मुण्डावर, बहरोड़, राजगढ़, कठूमर, अलवर शहर, थानागाजी विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी को लेकर कांग्रेस में स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं भाजपा के लिए राजगढ़, मुण्डावर, बानसूर, थानागाजी सहित कई अन्य विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं, जहां प्रत्याशी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

नए दावेदारों की उम्मीद जगी, स्थापित नेताओं की चिंता बढ़ी

दोनों प्रमुख दलों में अभ तक करीब आधे विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से युवा दावेदारों की उम्मीदें बढ़ गई है। ऐसे दावेदारों का मानना है कि एक-एक सीट का संघर्ष होने के कारण टिकट वितरण में साफ छवि व युवा चेहरे को प्राथमिकता दिया जाना तय है। इस कारण टिकट में उनका दांव लग सकता है। इसी उम्मीद के चलते दोनों ही दलों के युवा दावेदारों ने क्षेत्रों में चुनावी तैयारियां भी शुरू कर दी है।