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CBSE NEET 2018 : नीट परीक्षा में अलवर के होनहारों ने मनवाया लोहा, इनती रैंक लाकर किया जिले का नाम रोशन

नीट परीक्षा में अलवर के होनहारों ने मनवाया लोहा, इनती रैंक लाकर किया जिले का नाम रोशन
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अलवर

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Prem Pathak

Jun 05, 2018

CBSE NEET 2018 : Students of alwar perform well in NEET 2018

नीट परीक्षा में अलवर के होनहारों ने मनवाया लोहा, इनती रैंक लाकर किया जिले का नाम रोशन

केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (नीट) के घोषित परीक्षा परिणाम में अलवर के कई होनहार ने लोहा मनवाया है। इस बार अलवर में रहकर तैयारी करने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम नहीं है।

मेहनत से पाया मुकाम

अलवर के शिवाजी पार्क निवासी अनिशा मित्तल ने सामान्य कैटेगिरी में 190 वां स्थान पाया है। इनके पिता नीरज मित्तल अलवर के सामान्य अस्पताल में कम्पाउंडर हैं। इनकी मां सोनम मित्तल गृहणी हैं। इन्होंने अलवर के सीएलसी इंस्टीट्यूट अलवर में अध्ययन किया और यह मुकाम पाया। इनका कहना है कि मेरे दादाजी पुरुषोत्तम मित्तल और पापा मुझे इसके लिए हमेशा प्रेरित करते थे। सीएलसी के निदेशक वीरेन्द्र चौधरी का कहना है कि बीते वर्ष कक्षा 12 वीं के साथ इन्होंने यह परीक्षा दी थी, जिसमें 104 अंकों का इजाफा हुआ है।

डॉक्टर बनेगी ज्योति

तिजारा फाटक रोड अलवर निवासी ज्योति शर्मा ने नीट परीक्षा में 1035 वीं रैंक हासिल की है। इनके पिता पवन शर्मा सेना में नागालैंड में कम्पाउंडर के पद पर सेवारत्त हैं। इनकी ओबीसी में देश में 262 वीं रैंक बनी है। इनका कहना है कि मेरी मम्मी कुसुम शर्मा प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं जो हमेशा एक ही बात कहती थी कि मेरी ज्योति एक दिन डॉक्टर बनेगी। बीते वर्ष भी मैंने परीक्षा दी थी जिसमें 17 नम्बरों की बढ़ोतरी की है। इन्होंने सीएलसी अलवर में अध्ययन किया है।

डॉक्टर बनने की तमन्ना

अलवर के स्कीम नम्बर 10 अम्बेडकर सर्किल निवासी सक्षम अग्रवाल के पिता चिकित्सक केसी गागल हैं। इनके मम्मी डॉ. शर्मिला गागल हैं। इन्होंने नीट परीक्षा में 406 वीं रैंक प्राप्त की है। इनका कहना है कि मम्मी-पापा की प्रेरणा के कारण मैं इस मुकाम तक पहुंचा हूं। इसके लिए बस नियमित पढ़ाई की आवश्यकता है। सक्षम अग्रवाल का कहना है वह भी डॉक्टन बनना चाहता है और उसके लिए मेहनत कर रहा है।

पहले लक्ष्य तय करें

अलवर निवासी लविना राघव के पिता रविन्द्र सिंह व मम्मी बीना राघव हैं। इन्होंने एआईआर में 8983 वां स्थान पाया है। इन्होंने स्पेक्ट्रम कोचिंग में अध्ययन किया है। लविना डॉक्टर बनकर देश व समाज की सेवा करना चाहती हैं। वे कहती हैं कि एक बार कोई भी युवा अपना लक्ष्य तय कर लें तो उसे केवल उसी पर ध्यान देना चाहिए, उसे सफलता जरूर मिलेगी। कड़ी मेहनत और लक्ष्य को सामने रखकर ही सफलता पाई जा सकी है।

मेहनत से मिली मंजिल

अलवर शहर के स्कीम नम्बर 2 के रहने वाले तपस अग्रवाल ने नीट में 2 हजार 285 वीं रैंक बनाई है। इनके पिता डॉ. मुकेश गुप्ता हैं जबकि मां डॉ. सुनीता गुप्ता हैं। इन्होंने इस वर्ष नीट परीक्षा की जमकर तैयारी की जिसके परिणामस्वरूप यह स्थान पाया। इनका कहना है कि मुझे मम्मी और पापा को देखकर लगता था कि मैं भी डॉक्टर बनूं। तपस का कहना है कि मंजिल पाने के लिए पहले लक्ष्य तय करना चाहिए और इसके बाद उसके अनुसार तैयारी करनी चाहिए।

माता-पिता की प्रेरणा लाई रंग

बहरोड़ के निकट बर्डोद के नालपुर गांव के निवासी सचिन यादव का भी नीट परीक्षा में चयन हुआ है जिसने पहले प्रयास में ओबीसी वर्ग में 2900वीं रैंक प्राप्त की है। सचिन ने बताया कि माता-पिता व दादा-दादी की प्रेरणा से सफल हुए हैं। भविष्य में चिकित्सक बनकर आमजन की सेवा करना ही उद्देश्य है। सचिन एक किसान परिवार से निकले हैं। उनके पिता देशराज यादव भी किसान हैं।