अलवर में महिलाओं की खरीद फरोख्त व बलात्कार के मामले में कोर्ट ने इन आरोपियों को सुनाई इतने साल की कठोर सजा

महिलाओं की खरीद-फरोख्त, बलात्कार व वेश्यावृत्ति के लिए उत्प्रेरित करने का मामला

By: Hiren Joshi

Published: 19 Jan 2019, 11:31 AM IST

पोक्सो अधिनियम न्यायालय संख्या-2 के विशिष्ट न्यायाधीश देवेन्द्र सिंह नागर ने असम व झारखंड से महिलाओं को शोषण के प्रयोजन के लिए अलवर लाकर बंधक बनाकर रखने, बलात्कार, वेश्यावृत्ति के लिए उत्प्रेरित करने और बेचने के प्रकरण में तीन जनों को दस साल का कठोर कारावास और 15 हजार रुपए जुर्माने का आदेश दिया।
प्रकरण के अनुसार 3 सितम्बर 2015 को एक पीडि़ता ने पर्चा बयान के आधार पर पुलिस थाने म मामला दर्ज कराया। जिसमें पीडि़ता ने आरोप लगाया कि उसकी शादी असम के अब्दुल हसन नामक व्यक्ति ने एक लाख रुपए लेकर विशम्बर नामक व्यक्ति से कराई।

विशम्बर उसे बाबूलाल और असम की एक महिला प्रीति के माध्यम से ताराचंद को बेचना चाहता था। जब पीडि़ता ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उसे व झारखण्ड निवासी एक अन्य महिला को कमरे में बंद कर यातनाएं दी। पुलिस ने अनुसंधान में रैणी के परवैणी हाल 60 फीट रोड अलवर निवासी बाबूलाल मीणा पुत्र रामधन मीणा, रणजीत नगर निवासी ताराचंद सैनी पुत्र खेमचंद और बेरा जरार-मथुरा हाल सूर्यनगर अलवर निवासी विशम्बर दयाल पुत्र नानकचंद को गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। पुलिस ने एक अन्य महिला प्रीति पत्नी बीरबल निवासी रींगस पर भी आरोप लगाए।

विशिष्ट लोक अभियोजक कुलदीप जैन ने बताया कि प्रकरण में विशिष्ट न्यायाधीश देवेन्द्र सिंह नागर ने आरोप सिद्ध पाए जाने पर बाबूलाल मीणा, ताराचंद सैनी और विशम्बर दयाल को आईपीसी की धारा 370 में 10 साल का कठोर, 370-ए में 3 साल तथा 376 में 7 साल का कठोर कारावास के साथ 15 हजार रुपए अर्थदण्ड आदेश सुनाया। प्रकरण में आरोपी प्रीति पत्नी बीरबल फरार है। जिसके विरुद्ध प्रकरण लम्बित है।

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