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गोमांस की गुप्त मंडी बना मेवात, होम डिलीवरी की मिलती है सुविधा

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अलवर

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Prem Pathak

Aug 06, 2018

Cow Slaughter : Alwar Become Secret Market Of Cow Beef

गोमांस की गुप्त मंडी बना मेवात, होम डिलीवरी की मिलती है सुविधा

अलवर. जिले का मेवात अंचल गोमांस की गुप्त मंडी बन गया है। यहां से रोजाना चोरी छिपे सैकड़ों टन गोमांस जिले के विभिन्न हिस्सों सहित हरियाणा के मेवात इलाके व राजधानी दिल्ली तक पहुंचाया जाता है। जहां से यह विदेशों तक सप्लाई होता है। दरअसल, गोमांस की विदेशों में काफी डिमांड है। हरियाणा व मेवात क्षेत्र से इसे डिब्बों में पैक कर दिल्ली होकर बाहर के देशों में भेजा जाता है। वहीं, दूसरी ओर गोविन्दगढ़ में गोमांस व गाय की खाल मिलने से यह साफ हो गया कि जिले में न सिर्फ गोकशी बल्कि गोमांस का धंधा भी जोरों पर है। जिले के मेवात क्षेत्र से भी बड़ी मात्रा में गोमांस हरियाणा सहित दूसरे राज्यों में भेजा जाता है। गोमांस मिलने का जिले में यह पहला मामला नहीं है।

इससे पहले भी रामगढ़, नौगावां, किशनगढ़बास आदि क्षेत्रों में गोमांस मिल चुका है। अथवा ये कहें कि जिले के रामगढ़, नौगावां, गोविन्दगढ़ आदि क्षेत्र गोमांस की गुप्त मंडी के रूप में विकसित हो रहे है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। सकील ने भी पुलिस पूछताछ में बताया कि वह हरियाणा सहित आस-पास के मेवात क्षेत्र में गोमांस बेचता था। गोमांस की होम डिलीवरी भी करता था।

221 खालों से लगता है सहज अंदाजा

जिले में गोमांस का कारोबार कितने बड़े पैमाने पर है, इसका अंदाजा गोविन्दगढ़ में गोदाम में मिली 221 गायों की खालों से लगाया जा सकता है। पशु चिकित्सकों के अनुसार यह खालें ज्यादा से ज्यादा 15-20 दिन पुरानी थी। यानि केवल एक पखवाड़े में इतनी गायों को मारकर गोमांस बेचा गया।

सीमा पार से भी जुड़े हैं तार

गोमांस का कारोबार करने वालों के सीमा पार के लोगों से भी सम्पर्क जुड़ा हुआ है। दरअसल, रामगढ़, गोविन्दगढ़, नौगावां से हरियाणा के मेवात क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा लगता है। यहां गोमांस की काफी डिमांड है। ऐसे में इन इलाकों में गोमांस आसानी से बिक जाता है। पुलिस पूछताछ में सकील ने भी बताया कि वह हरियाणा के मेवात क्षेत्र में भी गोमांस की सप्लाई करता था।

ज्यादा मुनाफे ने बढ़ाई गोकशी

गोमांस के धंधे के फलने-फूलने का एक कारण अधिक मुनाफा भी है। दरअसल, इस धंधे से जुड़े लोगों को गोमांस के लिए गोवंश ढूढने में ज्यादा दिक्कत नहीं आती। गोमांस के लिए वे ज्यादातर आवारा गोवंश को शिकार बनाते हैं। ऐसा गोवंश उन्हें आसानी से अथवा सस्ते दामों पर सहज मिल जाता है। ऐसे गोवंश में रिस्क फैक्टर भी कम रहता है। जानकारों की मानें तो एक गोवंश में आसानी से एक से डेढ़ क्विंटल गोमांस निकल जाता है, जो सहज 80 से 100 रुपए किलो बिक जाता है। यानि एक गोवंश से 10 से 15 हजार रुपए की आमदनी हो जाती है। जबकि अन्य पशुओं के मांस की बिक्री में इतना मुनाफा नहीं होता।