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2007 में पुलिस की मदद करते गई थी इनके पति की जान, अब सरकारी कार्यालयों से अधिकारी भगा रहे, 10 साल से लगा रही हैं चक्कर

सावित्री देवी के पति की पुलिस की मदद करते जान चली गई थी, अब सावित्री देवी को सरकारी कार्यालयों के धक्के खाने पड़ रहे हैं।
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अलवर

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Hiren Joshi

Jan 18, 2019

Death In Helping Rajasthan Police In 2007

2007 में पुलिस की मदद करते गई थी इनके पति की जान, अब सरकारी कार्यालयों से अधिकारी भगा रहे, 10 साल से लगा रही हैं चक्कर

जिनके पति ने राजस्थान पुलिस की मदद करते अपनी जान गंवा दी, अब उन्हें अपना हक लेने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। और अब चक्कर लगाते-लगाते वे थक चुकी हैं। अलवर के मुंडावर में बडली कि ढाणी में रहने वाली सावित्री देवी 10 साल से अपने जीवन यापन के लिए सरकार से मिलने वाली जमीन के लिए धक्के खा रही है। सावित्री देवी के पति भीम सिंह की 2007 में पुलिस की मदद करते समय एक हादसे के दौरान जान चले गई थी। तब से जीवन यापन के लिए सावित्री देवी के पास कोई साधन नहीं है। वो किसी तरह खर्च चला रही हैं।

2007 में सीलगांव बावड़ी के पास टाटा 407 गाड़ी ने पुलिस की गाड़ी में टक्कर मारी थी। इस घटना में भीम सिंह की मौत हो गई थी। उस समय सावित्री देवी व उनके पूरे परिवार को भीम सिंह पर खासा गर्व हुआ। तो पुलिस ने भी उनको शासन से सावित्री देवी की मदद करते हुए 2008 में जमीन आवंटित करवाई। उसके बाद से आज तक सावित्री देवी जमीन के लिए सरकारी कार्यालयों में चक्कर लगा रही है। लेकिन उनको आज तक जमीन का एक टुकड़ा तक नहीं मिला। इस कार्यकाल में अलवर में छह जिला कलेक्टर बदल गए।

इतना ही नहीं 2014 में दूसरी बार फिर आए सावित्री देवी को जमीन आवंटित की गई, लेकिन फिर से सरकारी प्रकिया में उसको अटका कर रखा। सावित्री के पास जीवन यापन के लिए भी कोई काम व साधन नहीं है। ऐसे में वो किसी तरह लोगों की मदद से काम चला रही है। सावित्री देवी को उनका हक लेने के लिए जलील होना पड़ रहा है, सरकारी कार्यालयों में बाबू उन्हें फटकार लगाते रहते हैं। उनका कहना है कि वे जब भी सरकारी कार्यालय में काम के लिए जाती हैं तो बाबू या अधिकारी उन्हें भगा देते हैं।
सावित्री देवी ने कहा कि सरकारी आफिस के बाबू गंदे तरह से बोलते है। कहते है कि तुम्हारी फाइल अब बंद हो गई है। जाओ जमीन नहीं मिलेगी। लोग आफिस से भगा देते हैं। सावित्री देवी 10 साल से लगातार हक के लिए चक्कर लगाकर अब थक चुकी हैं।