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दिल्ली-बड़ोदरा एक्सप्रेस वे बदल देगा अलवर की सूरत

दिल्ली-बड़ोदरा एक्सप्रेस वे (एनएच 148 एन)प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने के बाद अलवर जिले की सूरत बदलने के आसार हैं। जिले के रामगढ़, रैणी व लक्ष्मणगढ़ के 52 गांवों से होकर करीब 72 किलोमीटर की दूरी तय करने वाला यह प्रोजेक्ट तीन तहसील क्षेत्रों की जीवन रेखा साबित हो सकता है। यह प्रोजेक्ट प्रदेश के अलवर, दौसा, सवाईमाधोपुर, कोटा व बंूदी जिलो से गुजरेगा।
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अलवर

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Prem Pathak

Jun 18, 2019

dehli badodra express way news

दिल्ली-बड़ोदरा एक्सप्रेस वे बदल देगा अलवर की सूरत


अलवर. दिल्ली-बड़ोदरा एक्सप्रेस वे (एनएच 148 एन)प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने के बाद अलवर जिले की सूरत बदलने के आसार हैं। जिले के रामगढ़, रैणी व लक्ष्मणगढ़ के 52 गांवों से होकर करीब 72 किलोमीटर की दूरी तय करने वाला यह प्रोजेक्ट तीन तहसील क्षेत्रों की जीवन रेखा साबित हो सकता है। यह प्रोजेक्ट प्रदेश के अलवर, दौसा, सवाईमाधोपुर, कोटा व बंूदी जिलो से गुजरेगा।

नेशनल हाइवे अथोरिटी की ओर से बनाए जाने दिल्ली-बडोदरा एक्सप्रेस वे के लिए अलवर जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहीं भूमि का अवार्ड भी पारित हो चुका है। एक्सप्रेस वे में जिन किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया है, उनके भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।

जिले में 2600 से ज्यादा किसानों की भूमि अधिग्रहित

एक्सप्रेस वे के लिए जिले के तीन तहसील क्षेत्रों के 2600 से ज्यादा किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई है। नेशनल हाइवे अथोरिटी की ओर से जिला प्रशासन को 200 करोड़ राशि का भुगतान भी किया जा चुका है। प्रोजेक्ट के तहत 3 ए नोटिफिकेशन के बाद सर्वे शुरू हो चुका है, वहीं 3 डी नोटिफिकेशन के बाद भूमि के चिह्निकरण का कार्य शुरू किया जा चुका है। चिह्निकरण का लाभ यह होगा कि किसानों को पता चल सकेगा कि उनकी कितनी भूमि अधिग्रहित की गई है और मुआवजा राशि कितनी तय हुई है।

भरतपुर जिले के चार गांव भी शामिल

प्रोजेक्ट में भरतपुर जिले के चार गांव भी शामिल है। वहीं 52 गांव अलवर जिले के शामिल हैं। इनमें रामगढ़ तहसील के 8, रैणी के 20 तथा लक्ष्मणगढ़ तहसील क्षेत्र 24 गांव शामिल हैं। दोनों जिलो में 71.625 किलोमीटर दूरी में एक्सप्रेस वे का निर्माण प्रस्तावित है। रामगढ़ तहसील क्षेत्र के मूनपुर करमला गांव से यह एक्सप्रेस वे जिले में प्रवेश करेगा और रैणी तहसील के प्रयागपुरा गांव होकर निकलेगा।

दो साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट

नेशनल हाइवे अथोरिटी ऑफ इण्डिया ने प्रोजेक्ट पूरा करने की अवधि दो साल निर्धारित की है। हरियाणा में एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। वहीं अलवर व भरतपुर जिले में प्रोजेक्ट को गति मिलने का इंतजार है।

मुआवजा के वितरण का पेच अटका

एक्सप्रेस वे निर्माण में मुआवजे का पेच अटका है। किसानों का कहना है कि उन्हें हरियाणा के फिरोजपुर झिरका की दर से अलवर जिले में भूमि के मुआवजे का भुगतान किया जा रहा है, जबकि उन्हें अलवर जिले के लिए तय भूमि के मुआवजे की दर मिलनी चाहिए। वहीं नेशनल हाइवे अथोरिटी ऑफ इण्डिया का कहना है कि किसानों को भूमि का मुआवजा कानून के हिसाब तय किया गया है। मुआवजे के लिए सरकार ने नियम बनाए हुए हैं।

जमीन का कब्जा मिलने का इंतजार

दिल्ली-बड़ोदरा एक्सप्रेस वे निर्माण के लिए अलवर जिले में जमीन का कब्जा मिलने का इंतजार है। किसानों को मुआवजे के वितरण के लिए 200 करोड़ की राशि दी जा चुकी है। प्रोजेक्ट के लिए सर्वे व भूमि चिह्निकरण का कार्य शुरू कर दिया गया है। प्रोजेक्ट को 700 दिन में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सुरेश कुमार

परियोजना निदेशक, एनएचएआई अलवर जोन