भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व सीएमएचओ ने किया सरेंडर, रिमांड पर भेजा

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By: Hiren Joshi

Published: 18 Dec 2018, 04:49 PM IST

अलवर. रिश्वत के आरोप में करीब डेढ़ साल से फरार चल रहे अलवर के तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. पंकज गुप्ता ने सोमवार को एसीबी कोर्ट अलवर में सरेंडर कर दिया। जहां से आरोपी को एक दिन के पीसी रिमांड सौंपा गया है। एसीबी आरोपी से पूछताछ कर रही है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो प्रथम के उपाधीक्षक महेन्द्र मीणा ने बताया कि तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. पंकज गुप्ता ने राजगढ़ के वेदांता हॉस्पिटल के संचालक डॉ. हरिमोहन सैनी से जननी सुरक्षा योजना के एमओयू पर हस्ताक्षर करने की एवज में 2 लाख रुपए की डिमांड की। बाद में सौदा डेढ़ लाख रुपए में तय हुआ। डॉ. सैनी ने इसकी शिकायत एसीबी अलवर को दी। शिकायत का सत्यापन कराने के बाद एसीबी टीम ने सीएमएचओ कार्यालय के जिला प्रोग्राम मैनेजर नभेंद्र सिंह भाटी को 11 अप्रेल 2017 को नंगली सर्किल से डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया था।

इसके बाद रिश्वत का आरोपी तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. पंकज गुप्ता फरार हो गया। आरोपी की तलाश में एसीबी ने कई बार दबिशें दी, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। सोमवार को रिश्वत के आरोपी डॉ. पंकज गुप्ता निवासी हिंडौन सिटी ने अलवर एसीबी कोर्ट में सरेंडर कर दिया। आरोपी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।

सरेंडर होने के दौरान भाई भी साथ आया

डॉ. पंकज गुप्ता ने सोमवार को काला कोट और काली पेंट पहनकर आए और एसीबी कोर्ट में सरेंडर किया। डॉ. गुप्ता के साथ रिश्वत का आरोपी उसका भाई अमित कुमार मंगल भी साथ आया था। दोपहर बाद डॉ. गुप्ता को कोर्ट में पेश किया गया। उल्लेखनीय है कि प्रकरण में आरोपी डीपीएम नभेन्द्र भाटी और अमित कुमार मंगल गिरफ्तारी के बाद कई माह तक न्यायिक अभिरक्षा में जेल में रहे। अब जमानत पर बाहर हैं।

भाई के माध्यम से डील का आरोप

एसीबी टीम ने पड़ताल में सामने आया कि डॉ. पंकज गुप्ता अपने भाई अमित कुमार मंगल के माध्यम से रिश्वत की डील करता था। रिश्वत राशि के साथ डीपीएम नभेंद्र भाटी की गिरफ्तारी के बाद से डॉ. गुप्ता का भाई अमित कुमार भी फरार चल रहा था। जिसे एसीबी ने 25 अक्टूबर को उसके निवास भारतीय कॉलोनी हिंडौनसिटी से गिरफ्तार कर लिया था।

और भी कई मामले आ सकते हैं सामने

तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. पंकज गुप्ता ने वेदांता हॉस्पिटल राजगढ़ को जननी सुरक्षा योजना के लिए स्वीकृति तो जारी कर दी थी, लेकिन रिश्वत वसूलने के एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। जिले में ऐसे और भी कई निजी हॉस्पिटल हैं। जिन्हें जननी सुरक्षा योजना के लिए स्वीकृति तो जारी कर दी गई थी, लेकिन उनका एमओयू रोका हुआ था। एसीबी इस मामले में भी आरोपी डॉ. पंकज गुप्ता से पूछताछ कर रही है।

सोशल मीडिया के माध्यम से देता रहा चुनौती

तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. पंकज गुप्ता रिश्वत के मामले का खुलासा होने के बाद तुरंत फरार हो गया था। उसकी गिरफ्तारी के लिए एसीबी टीम लगातार दबिशें देती रही, लेकिन वह एसीबी की गिरफ्त में नहीं आया। डॉ. पंकज फेसबुक और सोशल मीडिया पर मैसेज कर एसीबी को लगातार खुुलेआम चुनौती दे रहा था।

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