5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सफाईकर्मियों की हड़ताल के कारण अस्पताल में थी गंदगी, फिर पूर्व नेवी अफसर ने खुद की सफाई, साफ हो गया वार्ड

अलवर के सामान्य चिकित्सालय में गंदगी के कारण मरीज परेशान हुए। इसके बाद लोगों ने स्वयं वार्ड की सफाई की।
2 min read
Google source verification

अलवर

image

Hiren Joshi

Feb 20, 2019

EX Navy Officer And Other People Clean Alwar government Hospitals

सफाईकर्मियों के हड़ताल के कारण अस्पताल में थी गंदगी, फिर पूर्व नेवी अफसर ने खुद की सफाई, साफ हो गया वार्ड

अलवर जिला मुख्यालय के तीनों सरकारी अस्पतालों में चल रही सफाईकर्मियों की हड़ताल के कारण चिकित्सालय परिसर में गंदगी का आलम है। अस्पताल में गंदगी व बदबू से मरीजों को परेशानी हो रही है। हड़ताल 17 फरवरी से चल रही है, लेकिन अभी तक अस्पताल प्रशासन की ओर से इंतजाम नहीं किए गए हैं। ऐसे में अब परेशानी से बचने के लिए मरीजों के परिजनों ने ही अस्पताल में सफाई कर दी। मंगलवार को पूरे दिन लोग गंदगी से परेशान रहे। इसके बाद रात्रि में रामगढ़ क्षेत्र के गढ़ी धनेटा निवासी रिटायर्ड नेवी अफसर करनैल सिंह और उसके भाई मंजीत सिंह वार्ड में सफाई करने लग गए। उनसे प्रेरणा लेकर और लोग भी सफाई करने जुट गए और कुछ देर में वार्ड को साफ कर दिया।

वहीं सफाईकर्मचारियों सहित हड़ताल कर रहे अन्य कर्मचारियों ने अस्पताल के गेट पर प्रदर्शन किया। अस्पताल के सफाई कर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे हुए हैं। अस्पताल प्रशासन की तरफ से अस्पताल में सफाई के ठेके में बदलाव किया गया है। पहले तीनों अस्पतालों में सफाई का ठेका 12 लाख रुपए गया था। अब 5 लाख में सफाई की जिम्मेदारी कंपनी को दी गई है। उस कंपनी ने केवल 57 कर्मचारियों को लगाने के लिए कहा है। जबकि पुराने ठेकेदार के पास 100 सफाई कर्मी लगे हुए थे। ऐसे में नए ठेकेदार ने अन्य कर्मचारियों को नौकरी से हटाने व कर्मचारियों को 10 से 12 घंटे काम करने के आदेश दिए है। तो वहीं कंप्यूटर कर्मचारियों का कहना है कि ठेकेदार उनका शोषण करता है। कई बार न्यायालय के आदेश के बाद भी अस्पताल प्रशासन उनकी नहीं सुन रहा है।

कर्मचारियों की मांग है कि उनकी भर्ती मेडिकल रिलीफ सोसायटी के तहत होनी चाहिए। तो वही उनको वेतन सीधे बैंक खाते में मिलना चाहिए। उनके वेतन से पीएफ व ईएसआई की कटौती भी होनी चाहिए। अभी ठेकेदार 4 से 5 हजार रुपए वेतन देता है। तो ईएसआई व पीएफ की कटौती भी कर्मचारी के खाते से होती है। ऐसे में कर्मचारियों का कहना है कि उनका शोषण हो रहा है। लगातार कर्मचारियों की हड़ताल पर रहने से मरीज व उनके परिजनों की परेशानी बढ़ गई है। 2 दिन से मरीज के परिजन वार्ड में सफाई कर रहे हैं। तो वहीं शौचालयों के हालात खराब है। इन सब के बीच अस्पताल प्रशासन जिला प्रशासन अपनी आंखें बंद करके चुपचाप बैठा हुआ है।