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देश में बढ़ रहे प्रदूषण में पर जताई चिंता, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मदन लोकुर ने कर दी यह टिप्पणी, आप भी जानिए

देश में बढ़ रहे प्रदूषण पर पर्यावरणविदों ने चिंता जताई है, उनका कहना है कि प्रदूषण केे लिए हम सब जिम्मेदार है और यह सभी को नुकसान पहुंचा रहा है।
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अलवर

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Hiren Joshi

Feb 11, 2019

Former Judge Madan Lokur Statement On Air Pollution In India

देश में बढ़ रहे प्रदूषण में पर जताई चिंता, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मदन लोकुर ने कर दी यह टिप्पणी, आप भी जानिए

अलवर। देश में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए विख्यात पर्यावरणविद् सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की महानिदेशक सुनीता नारायण का कहना है कि अब नए रास्ते खोजने होंगे। दिल्ली सहित देश भर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण गरीब-अमीर का भेद नहीं करता है। दिल्ली में रहने वाले हर नागरिक को प्रदूषित वायु में सांस लेनी पड़ रही है। कुछ लोग उनसे पूछते हैं कि हवा शुद्ध होगी कि नहीं? लोग शुद्ध हवा के लिए गोवा या कहीं दूसरी जगहों पर जाते हैं पर वहां भी प्रदूषण बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमीर अपनी एसयूवी और अन्य तमाम प्रदूषण जनक साधनों से तो कोई चूल्हे से कोई पराली जलाकर प्रदूषण करता है। प्रदूषण भी इनमें भेद नहीं कर सबको प्रभावित करता जा रहा है।
राजस्थान-हरियाणा सीमा पर अलवर के तिजारा क्षेत्र के नीमली गांव में अनिल अग्रवाल एन्वायरमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित तीन दिवसीय मीडिया सम्मेलन के पहले दिन अनिल अग्रवाल संवाद में उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इस अवसर पर सुनीता नारायण और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने प्रतिष्ठित, स्टेज ऑफ एन्वायरमेंट रिपोर्ट-2019 जारी की। रिपोर्ट में जल-थल और नभ में फैल रहे प्रदूषण पर शोधपरक जानकारियां हैं जो आने वाले खतरे के संकेत हैं। सुनीता नारायण ने कहा कि लगातार बढ़ती जा रही प्रदूषण की समस्या के पीछे तीन मुख्य विफलताएं हैं। इमेजीनेशन, नॉलेज और इम्पलीमेंटेशन की विफलता के चलते समस्या बढ़़ती जा रही है। सम्मेलन में देशभर के पर्यावरण एवं विज्ञान पत्रकारिता से जुड़े पत्रकार और इन क्षेत्रों के विशेषज्ञ शिरकत कर रहे हैं।

हम खतरे को न्योता दे रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने पर्यावरण पर संकट के विभिन्न आयामों पर न्यायिक अनुभव के आधार पर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कड़े निर्णयों से ही कई बदलाव होते हैं। हालांकि प्लास्टिक लॉबी, माइनिंग लॉबी, कार लॉबी, फ्यूल लॉबी सहित कई तरह के हित समूह कायम हैं। उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि पहले गंगाजल बोतल में भरने पर शुद्ध नजर आता था और आज भरने पर अंतर समझ आ जाएगा। यही स्थिति ताजमहल की है। इसका कारण जल और वायु प्रदूषण हैं। उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान की तारीफ करते हुए कहा कि इसी तर्ज पर स्वच्छ न्यायालय भी होना चाहिए। वहां भी इसी तरह से सफाई होनी चाहिए। देश के मौसम विभाग के महानिदेशक के.जे.रमेश ने अतिवृष्टि, अनावृष्टि, सूखे और बाढ़ सहित विभिन्न जलवायु संबंधी बदलावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश में पिछले सात दशकों में वर्षा का समय कम हुआ है यद्यपि मात्रा बढ़ी है।
पहले दिन के दूसरे सत्र में वरिष्ठ पत्रकार अमित बरुह, रिचर्ड महापात्रा, परमार्थ समाज सेवा संस्थान के संजय सिंह, वर्धा से आए विजय जवांधिया और काउंसिल फॉर सोशल डवलपमेंट दिल्ली के अशोक पंकज ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर प्रजंटेशन दिए।