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इस बार गूगल, सेना और पंक्षी चुनेंगे प्रदेश की सरकार, बेहद रोचक है यह कहानी

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अलवर

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Hiren Joshi

Nov 13, 2018

Google, Sena, Panchi and Several Other Strange Name Voter In Rajasthan

इस बार गूगल, सेना और पंक्षी चुनेंगे प्रदेश की सरकार, बेहद रोचक है यह कहानी

बहरोड़. राजस्थान में इस बार गूगल, सेना, पंक्षी आदि प्रदेश की सरकार चुनेंगे। अलवर के बहरोड़ उपखंड मुख्यालय स्थित बंजारा बस्ती में मतदाताओं के नामों को लेकर काफी रोचकता सामने आई है। अधिकतर लोगों के नाम अजीबो-गरीब हैं। इस तरह के नाम सिर्फ घर में बुलाने के लिए नहीं हैं, बल्कि ये नाम उनके सरकारी रिकॉर्ड में भी दर्ज हैं। मतदाता सूची में इन नामों को देखकर बरबस ही नजरें ठहर जाती है। समाज की पुरानी पद्धतियों-परंपरानुसार पिछले कई वर्षों से इस समाज के लोग इन नामों को रख रहे हैं तथा इन नामों से ही मतदान करते हैं। अधिकतर नाम सरकारी संस्था अधिकारी, देश, फल, गाडिय़ों से जुड़े हुए हैं। बहरोड़ की मतदाता सूची के भाग संख्या 167 व 160 की मतदाता सूची में इस तरह के नाम के मतदाता पंजीकृत हैं।

नाम से ही खुश हो लेते है

बंजारा परिवारों के लोग अभी भी नहीं बदल रहे हंै। यह लोग बच्चों के भी इसी तरह रख रहे हैं। कस्बे की आसपास क्षेत्र में बसे इन बंजारा परिवार की बच्चों के नाम भी परिजन पुरानी तरह रख रहे हैं जिसमें अनेक छोटे बच्चों के नाम तो डिप्टी, थानेदार, तहसीलदार, पटवारी, पहलवान जैसे नाम भी शामिल हैं। इस तरह के नाम वाले बच्चे एक-दो नहीं बल्कि कई हैं। इस तरह के नामों को ये लोग बुरा नहीं मानते, बल्कि बोलने पर खुशी जताते कहते हैं कि अधिकारी बन नहीं सके तो नाम रख कर ही खुश हो लेते हंै।

उत्सव की तरह करते हैं मतदान

घुमंतू बंजारा समाज कई वर्षों पूर्व यहां आए थे जो अब लम्बे समय से यहां रह रहे हैं। यह समाज अपनी एकता के लिए जाना जाता है। यहां बस रहे समाज के लोग मतदान में पूरा भाग लेते हैं। मतदान का दिन उत्सव की तरह मनाते हैं। नए कपड़े पहन कर गीत गाते हुए मतदान करने जाते हैं जैसे किसी उत्सव में भाग लेने जा रहे हों। कस्बे के सरकारी अस्पताल व कोर्ट के पास बसे हुए बंजारा जो कभी करतब दिखा कर अपना गुजारा चलाते थे अब यह समाज अब काफी आगे है जो अब निर्माण कार्यों में मेहनत कर आधुनिक उपकरणों से काम को बढ़ा कर अच्छी कमाई कर प्रगति करने लगे हैं। बच्चे भी पढऩे लिखने की राह पर चलने लगे हंै।

फल व पक्षियों के नामों की फेहरिस्त

हालांकि वर्तमान में नए तरह के नामों का चलन है, लेकिन पुराने लोगों के नाम आज भी वही हैं। अब भी यह बदल नहीं रहे हंै। कई नाम ऐसे जो आमतौर पर समाज में नहीं होते जैसे पंछी, मेवा, सेना, केला, गूगल, चीकू, मारुति, लाडू आदि नाम रखे हुए हैं।

परंपरागत नाम है

घुमंतू बंजारा,नट समाज में पहले शिक्षा की कमी व घुमंतू जीवन होने के कारण जैसे हालात बने उसी तरह के नाम रख देते थे। जिस शहर,गांव में जन्म होने या किसी अधिकारी पद के अनुसार ही नाम रख दिए जाने की इनकी परंपरा रही है जो आज भी बरकरार है। इन बस्ती के लोगों को मतदान करने के लिए विशेष रूप से जागरूक किए जाने का काम इस बार किया गया है। जिसमें सभी लोगों ने शत प्रतिशत मतदान करने का संकल्प लिया है।
-राम अवतार कुमावत, उप जिला निर्वाचन अधिकारी बहरोड़