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खैरथल-तिजारा जिले का नाम और मुख्यालय बदलने से सरकार का इनकार

खैरथल-तिजारा जिले का नाम भर्तृहरि नगर करने और जिला मुख्यालय भिवाड़ी ट्रांसफर करने के मामले में नया मोड़ आ गया है। विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में सरकार ने जवाब दिया है कि न तो जिले का नाम और न ही जिला मुख्यालय को बदला गया है।

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सीएम फाइल फोटो (पत्रिका)

खैरथल-तिजारा जिले का नाम भर्तृहरि नगर करने और जिला मुख्यालय भिवाड़ी ट्रांसफर करने के मामले में नया मोड़ आ गया है। विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में सरकार ने जवाब दिया है कि न तो जिले का नाम और न ही जिला मुख्यालय को बदला गया है। कांग्रेस विधायक ललित यादव की ओर से यह प्रश्न पूछा गया था। यादव ने पूछा था कि क्या खैरथल-तिजारा जिले का नाम भर्तृहरि नगर का जिला मुख्यालय अन्यत्र स्थानांतरित किया जा रहा है?

यदि हां तो इसके लिए किन प्रशासनिक, भौगोलिक और आर्थिक मानदंडों को ध्यान में रखा गया है? इस पर राजस्व विभाग की ओर से उत्तर दिया गया है कि खैरथल-तिजारा जिले का नाम भर्तृहरि नगर का जिला मुख्यालय अन्यत्र स्थानांतरित करने का राजस्व विभाग के स्तर पर कोई परिपत्र या अधिसूचना वर्तमान में जारी नहीं की गई।

केंद्रीय मंत्री ने खुद ट्वीट कर स्वागत किया था

केंद्रीय वनमंत्री भूपेंद्र यादव ने 7 अगस्त को एक्स पर पोस्ट करके खैरथल-तिजारा जिले का नाम बदलकर भर्तृहरि नगर करने और जिला मुख्यालय भिवाड़ी करने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया था। उन्होंने लिखा था कि अलवर बाबा भर्तृहरि की तपोभूमि रहा है। इस निर्णय से क्षेत्र के सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

14 दिन से चल रहा है विरोध-प्रदर्शन

खैरथल-तिजारा का नाम और मुख्यालय बदलने के बाद से लगातार विरोध चल रहा है। खैरथल में पिछले 14 दिनों से आंदोलन चल रहा है। खैरथल जिला बचाओ संघर्ष समिति की ओर से चल रहे धरना प्रदर्शन में शुक्रवार को जिंदोली परगना व हरसौली परगना के किसान ट्रैक्टर के जरिए धरना स्थल पर पहुंचे और धरने को समर्थन दिया।

मुख्यालय नहीं बदलेंगे, दे चुके हैं आश्वासन

खैरथल में लगातार चल रहे विरोध के बीच भाजपा जिलाध्यक्ष उत्तर महासिंह और जिला प्रमुख ने प्रेस कांफ्रेंस की थी। दोनों नेताओं ने आश्वासन दिया था कि मुख्यालय नहीं बदला जाएगा, लेकिन जनता लिखित में देने पर अड़ी हुई है। इस वजह से अब तक विरोध-प्रदर्शन चल रहा है।

भर्तृहरि में भी विरोध

खैरथल-तिजारा का भर्तृहरि नगर नाम रखने का भर्तृहरि बचाओ समिति विरोध किया था। समिति का कहना था कि अगर सरकार भर्तृहरि नगर बसाना चाहती है तो भर्तृहरि क्षेत्र में ही बसाए। इसे लेकर ज्ञापन भी दिए जा चुके हैं।