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Alwar News: अलवर शहर में बनेंगे 50 मिनी फॉरेस्ट, लगेंगे 1.5 लाख पौधे

अलवर को ज्यादा हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने ‘हरियालो अलवर’ अभियान शुरू किया है। इस योजना के तहत शहर में 50 स्थानों पर मियावाकी पद्धति से मिनी फॉरेस्ट विकसित किए जाएंगे। जनभागीदारी के जरिए करीब 1.5 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
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hariyalo alwar 50 mini forest

representative picture (AI)

अलवर शहर की हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन ने ‘हरियालो अलवर’ अभियान की शुरुआत की है। इस पहल के तहत शहर में 50 अलग-अलग स्थानों पर मियावाकी तकनीक से मिनी फॉरेस्ट विकसित किए जाएंगे। प्रशासन का लक्ष्य इन सभी स्थानों पर करीब 1.5 लाख पौधे लगाकर अलवर को अधिक हरा भरा, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

लोगों से मांगे सुझाव

अभियान का सबसे खास पहलू यह है कि इसमें आम लोगों की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। प्रशासन चाहता है कि नागरिक, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), सामाजिक संस्थाएं, स्कूल, कॉलेज और अन्य संगठन इस अभियान से जुड़ें और अपने आसपास हरियाली बढ़ाने में योगदान दें।

योजना के अनुसार शहर में ऐसे सार्वजनिक स्थानों की पहचान की जाएगी, जहां मिनी फॉरेस्ट विकसित किए जा सकते हैं। इनमें पार्क, कॉलेज परिसर, कॉलोनियां, पर्यटन स्थल और अन्य खाली सार्वजनिक भूमि शामिल होगी। यदि किसी क्षेत्र के लिए स्थानीय लोगों की ओर से सुझाव आते हैं, तो उन स्थानों पर भी विचार किया जाएगा।

चार चरणों की कार्य योजना तैयार

प्रशासन ने इस अभियान के लिए चार चरणों की कार्य योजना तैयार की है। पहले चरण में उपयुक्त स्थानों का चयन होगा। दूसरे चरण में संबंधित विभागों और स्थानीय संस्थाओं की मदद से इन स्थानों को विकसित किया जाएगा। तीसरे चरण में मियावाकी पद्धति से घने वृक्षारोपण (पौधारोपण) का कार्य होगा। इसके बाद अगले तीन वर्षों तक पौधों की नियमित देखभाल, निगरानी और रखरखाव किया जाएगा, ताकि लगाए गए पौधे सुरक्षित रूप से विकसित हो सकें।

क्या है मियावाकी तकनीक

मियावाकी तकनीक में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को बहुत कम दूरी पर लगाया जाता है। आमतौर पर एक वर्ग मीटर में तीन से पांच पौधे लगाए जाते हैं। इससे कम समय में घना जंगल तैयार हो जाता है। ऐसे मिनी फॉरेस्ट सामान्य पौधारोपण की तुलना में तेजी से बढ़ते हैं और जैव विविधता बढ़ाने, कार्बन अवशोषण, तापमान कम करने तथा वायु गुणवत्ता सुधारने में मददगार माने जाते हैं।

करीब 1.5 लाख पौधे लगेंगे

योजना के अनुसार प्रत्येक मिनी फॉरेस्ट में करीब 3,000 पौधे लगाए जाएंगे। इस तरह 50 स्थानों पर कुल लगभग 1.5 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा। जिला प्रशासन का मानना है कि यह अभियान भविष्य में शहर की हरित आवरण बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव को घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अलवर प्रशासन ने शहरवासियों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने और अपने आसपास हरियाली बढ़ाने में सहयोग की अपील की है।