
सारे नेताओं के झूठे वादे बताती हजारी की झौपड़ी
अलवर.
वोट किसको देंगे शब्द कानों में पड़ते ही पानी ढो रहे हजारीलाल ने बेचारगी के साथ सिर उठाया और कहा कि पहले ‘मुझे और मेरी झोपड़ी को देख लो। 75 सालों से वोट दे रहा हूं फिर भी ये बूढ़े कंधे पानी ढोने को मजबूर हैं, यहां न बिजली है न पानी और ना ही किसी तरह की सुविधाएं, सब कुछ वैसा ही है जैसा 75 साल पहले था, हां बदलाव आया है नेताओं की गाडिय़ों में, पहले वे जीपों में आते थे, अब वातानुकूलित कारों में आते हैं।’
ये कहानी ततारपुर गांव के निकट पहाड़ी की तलहटी में बसे पहलवान हजारी लाल की है। पहलवान का कहना है कि न जाने कितनी सरकारों को देख लिया। चुनाव के बाद बिजली व पानी की समस्या का समाधान कर देंगे, यह कहकर चले जाते हैं, बाद में कोई मुडकऱ भी नहीं देखता। जिले भर के नेता पांच साल में न जाने कितनी बार इसी रोड से निकलते हैं लेकिन, किसी की गाड़ी के ब्रेक नहीं लगते। इस बार आप आकर वोट के लिए पूछ रहे हैं तो फिर एक बार वोट दे दूंगा।
विधानसभा चुनाव में आए कई
अभी लोकसभा चुनाव में कोई नेता वोट मांगने नहीं आया, लेकिन विधानसभा चुनाव में नेताओं के रिश्तेदार भी दिल्ली से आए थे। आश्वासन दिए कि चुनाव के बाद समस्या का समाधान कराएंगे। इस उम्मीद में वोट भी किया। विधानसभा चुनाव हुए चार माह से अधिक समय हो गया। न नेता आया न वोट दिलाने के लिए पहुंचा उसका रिश्तेदार आया। हम उसी हाल में जी रहे हैं।
बस स्टैण्ड से ला रहे पानी
पहलवान हजारी लाल ने कहा कि बस स्टैण्ड से पानी लेकर आते हैं। पशुओं के लिए भी पानी लाना पड़ता है। देख लो सब मटके खाली पड़े हैं। सरकारी आंकड़े जुटाने वाले व कागजी रिकॉर्ड बनाने वाले घर पर लिख गए कि अत्यंत गरीब हूं। कभी झोपड़ी को वन क्षेत्र में बताकर टरका देते हैं।
Updated on:
01 May 2019 09:10 pm
Published on:
01 May 2019 09:10 pm
