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अलवर की व्यवस्था देखिए, वार्डों में ठिठुर रहे मरीज और डॉक्टर्स के चैम्बर में हीटर

अलवर के सामान्य व जनाना अस्पताल में डॉक्टर को हीटर तक की सुविधा दी हुई है, लेकिन मरीज सर्दी से ठिठुर रहे हैं।
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अलवर

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Hiren Joshi

Dec 28, 2018

Heater In Chamber of Doctor Where No Facility To Patients

अलवर की व्यवस्था देखिए, वार्डों में ठिठुर रहे मरीज और डॉक्टर्स के चैम्बर में हीटर

सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों की जान जोखिम में है। वार्डों की टूटी खिड़कियों से सर्द हवा और गलन मरीजों के बिस्तर तक पहुंच रही है। पतले से सरकारी कम्बल में मरीज रातभर ठिठुरते रहते हैं। वहीं, चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ दिन में भी हीटर के आगे बैठे रहते हैं। मरीजों को नश्तर की तरह चुभ रही सर्दी की रोकथाम के लिए अस्पताल प्रशासन बेपरवाह बना हुआ है। वार्डों में मरीजों तक पहुंच रही सर्दी को रोकने के बंदोबस्त तक नहीं किए जा रहे हैं। बुधवार देर रात और गुरुवार दिन में पत्रिका टीम ने जिला मुख्यालय के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल और जनाना अस्तपाल के हालात जाने तो मरीजों की ठिठुरन देख रोंगटे खड़े हो गए।

चिकित्सक तो कहीं नर्सिंग स्टाफ हीटर के आगे

पत्रिका टीम गुरुवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे राजीव गांधी सामान्य अस्पताल पहुंची। मेडिकल ज्यूरिष्ट कक्ष में डॉ. उदयभान बैठे हुए थे। उसकी कुर्सी के पास ही हीटर लगा हुआ था, जो चालू था। टीम अस्पताल परिसर को देखते हुए बर्न वार्ड में पहुंची। वहां तीन नर्सिंग स्टूडेंट हीटर के आगे बैठे थे। पूछने पर उन्होंने बताया ये हीटर वार्ड इंचार्ज ने लगाया हुआ है। वहीं, सामान्य अस्पताल की नई बिल्ंिडग स्थित हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक के कक्ष में मरीजों की कतार लगी हुई थी। मरीजों को देख रहे चिकित्सक ने अपनी कुर्सी के पास ही हीटर लगाया हुआ था।

कम्बल में कांप रहे थे मरीज

बुधवार रात करीब साढ़े 11 बजे पत्रिका टीम सामान्य अस्पताल के वार्डों में पहुंची। वहां टूटी खिड़कियों से सर्द हवा सीधे मरीजों तक पहुंच रही थी। जिससे वार्डों में गलन बनी हुई थी। कई मरीजों के पास सर्दी से बचाव के लिए सिर्फ एक पतला सा सरकारी कम्बल था। मरीज इस कम्बल को ओढे हुए थे, लेकिन इसमें उनकी सर्दी नहीं रुक रही थी। मरीज कम्बल के भीतर भी कांप रहे थे।

पर्दा नहीं तो कहीं टूटी खिडक़ी, कम्बल में भी छेद

सामान्य अस्तपाल के मेल व फीमेल सर्जीकल वार्ड और जनाना अस्तपाल के कई वार्डों में खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे। जिनमें से सीधी हवा अंदर आ रही थी। इन टूटे शीशों की खिड़कियों में हवा को रोकने के लिए ना पर्दे लगे हुए थे और ना ही कोई गत्ता आदि। इसके अलावा कई मरीजों ने ऐसे सरकारी कम्बल भी ओढ रखे थे। जिनमें छेद थे। इन छेदों में से सर्दी मरीजों तक पहुंच रही थी।

चूहे और कुत्ते भी घूमते हैं

सामान्य अस्पताल और जनाना अस्पताल में हालात इतने खराब हैं कि वार्डों में कुत्ते और चूहे मरीजों के बैड के इर्द-गिर्द घूमते रहते हैं। इससे मरीजों में संक्रमण का पूरा खतरा बना हुआ है।