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मुद्दा क्या है : नेताओं की जुबां पर नहीं हैं मतदाताओं के मुद्दे, जानिए क्या हैं अलवर के लोगों के मुद्दे

लोकसभा चुनाव में पत्रिका मतदाताओं के मुद्दे जान रहा है, इसी कड़ी में अलवर के कुछ और लोगों के मुद्दे आपके सामने हैं।
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अलवर

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Hiren Joshi

Apr 24, 2019

Issue Of Alwar People In Lok Sabha Elections

मुद्दा क्या है : नेताओं की जुबां पर नहीं हैं मतदाताओं के मुद्दे, जानिए क्या हैं अलवर के लोगों के मुद्दे

अलवर. लोकसभा के आम चुनाव में जागरूक मतदाता के मुद्दे नेताओं की जुबां पर नहीं है। जिन मुद्दों का समाधान जनता चाहती है उनकी कहीं चर्चा नहीं है। राजस्थान पत्रिका ने अलवर जिला मुख्यालय पर व्यापार से जुड़े मतदाताओं से चुनाव के मुद्दे जाने तो उन्होंने कई मुद्दे सामने रखे। निश्चित रूप से जमीन से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिया जाए तो गरीब व मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिल सकती है। आइए जानते हैं ऐसे मुद्दे, जो चर्चा में सामने आए हैं।

मत्स्य उद्योग संघ के अध्यक्ष मोहन नहलानी ने कहा कि एमआईए सबसे पुराना औद्योगिक क्षेत्र है। जिसका न विकास हुआ न कनेक्टिविटी सुधरी। जिसके कारण आमजन को उतना लाभ नहीं मिल पा रहा। जितना संभव है। जिला स्वर्णकार समाज के अध्यक्ष शीशराम सोनी ने कहा कि एनसीआर में शामिल होने के बावजूद अलवर जिले को कोई लाभ नहीं मिला है। यहां के मूलभूत ढांचे में थोड़ा भी बदलाव नहीं हो सका है। यही बड़े मुद्दे हैं। अलवर व्यापार महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल ने कहा कि एमआईए में बनाए गए फूड पार्क को विकसित करने पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। 15 सालों के बाद भी कुछ आगे नहीं बढ़ा। उद्योग लगाने का उद्देश्य अधूरा है।

महिलाओं को आधा हिस्सा मिले, पानी मुद्दा

बिजनेस वूमन अल्का का कहना है कि आधी आबादी महिलाओं की है तो हर जगह उनको आधा हक मिलना चाहिए। चाहे राजनीति हो या कोई दूसरा मंच। तभी तो महिलाएं सशक्त होंगी। उनकी सोच को महत्व मिलेगा। सरकारों को पुराने चलते कार्यों को आगे बढ़ाने की जरूरत है। मॉड्यूलर किचन से जुडे बिजनेसमैन ओमवीर सिंह का कहना है कि जतना को मुद्द समझने की जरूरत है। थोपे गए मुद्दों पर बहस नहीं करें। जिले में पानी की समस्या बड़ी है। इससे बड़ा मुद्दा नहीं है।

एक और केन्द्रीय विद्यालय मिले

बिजनेसमैन विपुल भार्गव का कहना है कि निजी स्कूलों की फीस पर लगाम तो नहीं लग सकी। अब जरूरत है कम से कम एक केन्द्रीय विद्यालय और मिले। ताकि गरीब व मध्यम वर्ग के बच्चों को अच्छे स्कूल मिल सकें। निजी स्कूलों में कॉपी, किताब, ड्रेव व फीस में लूट मची है। बिजनेसमैन अजय सोनी का कहना है कि सांसद ऐसा चुनने की जरूरत है जो खुद विकास में समक्ष हो। दूसरों के थोपे मुद्दे आगे नहीं बढ़ाए। बिजनेसमैन दिनेश सोनी का कहना है कि सांसद बनने वाला प्रत्याशी सहज हो। विकास कराने में सक्षम हो। उसे ही आगे लाने का मुद्दा होना चाहिए।

किसान को नहीं मिली दोगुनी आय

व्यापारी पप्पू सैनी का कहना है कि किसान की स्थिति सुधारने की जरूरत है। केवल हर मंच से यह कहने से उसकी हालात नहीं सुधरेगी कि किसानों की आय दोगुनी कर दी। हकीकत जानने की जरूरत है। किसान की फसल भी समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदी जा रही है। हैवल्स इण्डिया के आरके काजला का कहना है कि तकनीकी स्कूल व कॉलेजों में स्किल पावर विकसित नहीं किया जाना मुद्दा है। स्किल पावर विकसित होने पर ही रोजगार की राह आसान हो सकेगी। व्यापारी देवेन्द्र छाबड़ा का कहना है कि यह देश का चुनाव है। राष्ट्र सुरक्षा पहले बाकी मुद्दे बाद में होने चाहिए।

ये मुद्दे उठाए

1. एनसीआर का लाभ मिले

2. केन्द्रीय विद्यालय बढं़े

3. चम्बल का पानी आए

4. किसान को फसल का पूरा
दाम मिले

5. स्कूल-कॉलेजों में स्किल मिले