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राजगढ़. उपखण्ड मुख्यालय पर सबसे बड़े खेल मैदान प्रताप स्टेडियम बदहाल है। यहां सुविधाओं का अभाव होने से खिलाडि़यों को खेल सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। आरोप है कि स्टेडियम में ट्रैक का निर्माण कार्य लंबे से बंद पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार क्षेत्र के 140 विद्यालयों में खेल मैदान उपलब्ध तो है, लेकिन हालात सही नहीं है। इसके अलावा 76 विद्यालयों में खेल मैदान नहीं है। खेल प्रशिक्षक शिवदयाल सैनी का कहना है कि माचाड़ी मार्ग स्थित राजगढ़ उपखण्ड का सबसे बड़ा राउमावि का प्रताप स्टेडियम है। जिस पर छत नहीं होने के कारण टैण्ट लगाना पड़ता है। जिससे अनावश्यक खर्चा होता है। न ही लाइट की व्यवस्था है। ट्रैक भी नहीं है। बास्केटबॉल का मैदान कच्चा है। उसे सीसी बनाना चाहिए। चेजिंग रूम नहीं है। न ही लेट-बॉथ व पानी की सुविधा है। खिलाडियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा हैं। सुरक्षा दीवार कई स्थानों से टूटी हुई है। मुख्य गेट भी टूटा होने के कारण पशु विचरण करते रहते हैं। ट्रैक का निर्माण कार्य कई माह से बंद पड़ा है। उन्होंने बताया कि राजगढ़ उपखण्ड क्षेत्र के खिलाडि़यों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है।कोच की हो नियुक्ति
खेल प्रेमियों के अनुसार एक स्थायी कोच की नियुक्ति की जानी चाहिए। इसी खेल मैदान से अधिकांश खिलाड़ी निकलते हैं। 100 से अधिक खिलाड़ी एथलेक्टिस में जिला, राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल प्राप्त कर चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 4-5 खिलाड़ी व विश्व स्तर पर करीब 5 खिलाड़ी मेडल जीत चुके हैं।खेल मैदान विकसित होने चाहिए
हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट खेलने के लिए खेल मैदान विकसित होने चाहिए। वालीबॉल, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, खो-खो के लिए अलग से खेल मैदान विकसित किए जाए तो खिलाडि़यों को सुविधा मिले। राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय गोलाकाबास के खेल मैदान पर अतिक्रमण किया हुआ है।लीलावती मीना, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी।
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कठूमर मुख्यालय पर खेल मैदान का अभाव
कठूमर. उपखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों से कई खेलों में राष्ट्रीय व राज्य स्तर के विभिन्न खेलों में कई खिलाड़ी खेल चुके हैं, लेकिन सुविधाओं व संसाधन का अभाव खल रहा है। पूरे विधानसभा क्षेत्र में खेल स्टेडियम या पर्याप्त खेल मैदान नहीं है। जिससे स्थानीय प्रतिभाएं तैयारी नहीं कर पाती। कस्बे में राउमावि के पास पत्ती वाले खेल मैदान की जगह थी, लेकिन उस पर छात्र महाविद्यालय बनने से जगह सिमट गई। हालांकि इसी साल गणगौर मेले में खेल स्टेडियम बनवाने की घोषणा की गई है, लेकिन अभी ये धरातल पर नजर नहीं आती है। राष्ट्रीय स्तर के खो-खो खिलाड़ी शिब्बोराम सोनी व शारीरिक शिक्षक बताते है कि मैदान या स्टेडियम के अभाव में अब खेतों या पंचायत समिति परिसर में प्रशिक्षण देने की मजबूरी है। कठूमर से भाला फेंक, गोला फेंक, कुश्ती, वालीबॉल आदि खेलों में अनेक खिलाड़ी नेशनल लेवल पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
Published on:
29 Aug 2025 12:11 am
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