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श्रम विभाग के अधिकारियों की लेट-लतीफी, श्रमिकों पर भारी

अलवर. श्रम विभाग की लापरवाही और लेट-लतीफी का खामियाजा अलवर जिले के सैकड़ों श्रमिकों को उठाना पड़ रहा है। भवन और अन्य निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों ने कई कल्याणकारी योजनाओं के लिए एक साल पहले आवेदन किए जिनका निस्तारण समय पर नहीं किया गया ।
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अलवर

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Hiren Joshi

Apr 04, 2019

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श्रम विभाग के अधिकारियों की लेट-लतीफी, श्रमिकों पर भारी


अब इन योजनाओं में शर्ते लागू होने का खामियाजा श्रमिकों को उठाना पड़ रहा है जिन पर नए नियम लागू किए जा रहे हैं।

निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों की योजनाओं के लिए पहले नियोजक का प्रफोर्मा अलग था जिसमें पहले नियोजनकर्ता का आधार कार्ड और आईडी की औपचारिकता पूरी करवा रहे थे। श्रम विभाग के नए नियमों के अनुसार अब नियोजक का पेन कार्ड भी देना होगा। यह नया नियम लागू होने के बाद प्रार्थना पत्र देने वाले श्रमिकों पर इसे लागू करना चाहिए था लेकिन अब इसे पुराने लंबित आवेदनों पर भी मांगा जा रहा है।

श्रमिक कहां से आए पेन कार्ड-

श्रमिकों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उनके आवेदन पत्रों को पहले स्वीकृत कर दिया लेकिन उनका भुगतान नहीं हो पाया है। अब एक या डेढ़ साल बाद श्रमिकों को नियोजक पेन कार्ड देने को तैयार नहीं है जो काम वे पहले ही छोड़ चुके हैं। कई श्रमिक नियोजकों के आफिसों में चक्कर लगाकर परेशान हो चुके हैं लेकिन उन्हें कोई भी नए नियमों के तहत अन्य प्रमाण देने को तैयार नहीं है।

इनका भुगतान अटका-

अलवर जिले में शुभ शक्ति योजना में श्रमिक की बेटी के १८ वर्ष की उम्र होने पर उसे ५५ हजार रुपए की राशि स्वीकृत की जाती है। इसी प्रकार श्रमिक के बच्चों को २५ हजार रुपए वार्षिक तक छात्रवृत्ति दिए जाने का प्रावधान है। श्रमिक की मृत्यु के बाद उसके परिजनों को २ लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। इन योजनाओं में निर्माण श्रमिकों की ओर से आवेदन किए थे जिन्हे अब नए नियमों के फेर में अटका दिया है। एेसे लंबित प्रकरणों की संख्या ८०० से अधिक है। इनमें सबसे अधिक परेशानी उन श्रमिकों की है जिनकी फाइल तो स्वीकृत हो गई लेकिन उनकी स्वीकृत राशि तक नहीं दी गई, जिनसे ही नए नियमों के अनुसार प्रमाण मांगे जा रहे हैं।