5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

चन्द्र ग्रहण : नई पीढ़ी में देखने को रहा उत्साह, बुजुर्गों ने निभाई परंपरा

https://www.patrika.com/alwar-news/
2 min read
Google source verification

अलवर

image

Prem Pathak

Jul 28, 2018

lunar eclipse : temples are closed due to lunar eclipse

चन्द्र ग्रहण : नई पीढ़ी में देखने को रहा उत्साह, बुजुर्गों ने निभाई परंपरा

अलवर. इस साल का आखिरी चंदग्रहण शुक्रवार की रात को दिखाई दिया। इसे देखने का नई पीढ़ी में काफी उत्साह दिखाई दिया। इस बार चंद्रग्रहण कैसा होगा, चंद्रमा कैसा दिखेगा कुछ सवाल सुबह से ही मन में उठने लगे । इन जिज्ञासाओं का हल ढुंढऩे के लिए रात को छत पर पहुंचे और चंद्रग्रहण का नजारा देखने का प्रयास किया। दूसरी तरफ घर के बुजूर्गो ने चंद्रगहण के चलते वर्षो से निभाई जा रही परंपरा निभाते हुए सूतक से पहले ही भोजन कर लिया। घर में रखे खाद्य पदार्थो की शुुद्धता के लिए उसमें डाब भी डाली गई।
इधर, ग्रहण का सूतक दोपहर 2.54 बजे प्रारंभ होने हो जाने से मंदिरों में भगवान के पट बंद रहे। इसके चलते घरों में और मंदिरों में संध्या आरती नहीं हो पाई। इसके चलते प्रतिदिन दर्शनों के लिए आने वाले भक्तों की संख्या बहुत कम रही। मंदिरा में शाम को भजन कीर्तन आदि धार्मिक आयेाजन किए गए ।
नई पीढी सुबह से ही इस बात को लेकर उत्साहित थी कि रात को चंद्रग्रहण देखना है। भले ही उन्हें रात को जागना पड़े। इसके लिए परिजन चंद्रग्रहण नहीं देखने की बात कहते रहे, लेकिन इसके बाद भी बच्चे रात को जिद करते हुए चंद्रहण देखने के लिए अपने घरों से बाहर आ गए।
चंद्रग्रहण रात्रि को 11 बजकर 54 मिनट पर प्रारंभ हुआ । इसका समापन मध्यरात्रि को 3 बजकर 49 मिनट पर हुआ।

मैं रोज जल्दी सो जाता हूं, लेकिन में रात को खगोलिय घटना होने के कारण का इंतजार करता रहा। जैसे ही ग्रहण का समय हुआ मैंने अपनी छत पर जाकर ग्रहण देखा। मुझे बहुत अच्छा लगा।
जतिन सिंह, श्री गुरु हरिकिशन पब्लिक स्कूल

चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी जब एक सीध में होते हैं तब चंद्रग्रहण होता है। मैँने पढ़ा था कि मंगल ग्रह पृथ्वी के सबसे नजदीक रहेगा। मुझे सुबह से उत्साह बना हुआ है।
खुशी शर्मा, छात्रा

मैं पहली बार चंद्रग्रहण देख रही हूं। अभी तक किताबों में ही इसके बारे में पढ़ा था अब देखने का मौका मिला है। इसलिए इसे छोडऩा नहीं चाहती थी।
प्रे शर्मा, ओसवाल स्कूल

कभी कभी इस तरह की खगोलिय घटनाएं होती है । इस बार खग्रास चंदग्रहण होने के कारण यह बहुत खास है। मैं यह मौका खोना नहीं चाहता।
विनय गोयल, ओसवाल स्कूल