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NGT का बड़ा एक्शन: राजस्थान के 17 जिला कलेक्टरों को नोटिस, 1400 करोड़ के ‘पानी घोटाले’ पर जवाब-तलब

एनजीटी ने रीको क्षेत्रों के 460 ट्यूबवेल से रोजाना 6.90 करोड़ लीटर भूजल दोहन पर चिंता जताते हुए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण समेत 17 जिलों के कलक्टरों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत शपथ पत्र मांगा। साथ ही राजस्थान, एमपी व छत्तीसगढ़ सरकारों को जल सुरक्षा पर ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।

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Major NGT Action

केंद्रीय भूजल प्राधिकरण सहित 17 कलक्टरों को नोटिस (फोटो-एआई)

अलवर: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भावी पीढ़ी के लिए जल सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अति-दोहित व संकटग्रस्त इलाकों में भूजल रिचार्ज के लिए ठोस कदम उठाने जरूरी हैं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के 24 सितंबर 2025 को जारी किए गए आदेश की पालना करनी होगी।

इसकी पालना के लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण सहित प्रदेश के 17 जिलों के जिला कलेक्टरों को नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। ये सभी व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करेंगे। अन्यथा एनजीटी में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए 19 मार्च को होने वाली सुनवाई में तलब होंगे।

जस्टिस शिव कुमार सिंह ने बीकानेर के सर्वोदय बस्ती निवासी ताहिर हुसैन की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त टिप्पणी की। याचिका में कहा गया कि प्रदेश के 160 रीको क्षेत्रों में 460 ट्यूबवेल के जरिए बिना अनुमति के 6.90 करोड़ लीटर से अधिक जलदोहन प्रतिदिन हो रहा है।

जस्टिस शिव कुमार सिंह ने कहा है कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की अनुमति के बिना रीको औद्योगिक एवं कर्मचारी, श्रमिकों के घरेलू कार्यों के लिए भूजल की आपूर्ति नहीं कर सकता, लेकिन ऐसा किया जा रहा है।

यह सुप्रीम कोर्ट के 24 सितंबर 2025 के आदेश का खुला उल्लंघन है, जिससे पर्यावरणीय क्षति भी पहुंच रही है। एनजीटी में विभिन्न अथॉरिटी की ओर से पेश किए गए सरकारी आंकड़ों को देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि केवल कागजों में ही कार्य नहीं दिखना चाहिए, बल्कि हकीकत में भी नजर आना चाहिए।

इस तरह लगा सरकार को 1400 करोड़ का चूना

वर्ष 2017 में प्रदेश के 160 औद्योगिक क्षेत्रों में 460 ट्यूबवेल से घरेलू व व्यावसायिक कनेक्शन दिए गए थे। इसके लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की अनुमति जरूरी थी, जो नहीं ली गई। स्थानीय प्रशासन को कठोर कदम उठाने थे, जो नहीं उठाए गए। इससे सरकार को 1400 करोड़ से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ।

इसको लेकर वर्ष 2024 में एनजीटी में ताहिर हुसैन ने याचिका दायर की, जिसके बाद रीको पर 275 करोड़ की पेनाल्टी भी लगाई गई। साथ ही एक अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 24 सितंबर को कड़े आदेश दिए। कहा कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की अनुमति के यह जल आपूर्ति नहीं हो सकती।

इनको देने होंगे शपथ पत्र

एनजीटी में राजस्थान के अलवर, बीकानेर, बाड़मेर, सीकर, उदयपुर, भीलवाड़ा, चूरू, सिरोही, श्रीगंगानगर, जालोर, झुंझुनूं, कोटा, जयपुर, पाली, सवाई माधोपुर, करौली व राजसमंद के जिला कलक्टर को शपथ पत्र देना होगा।