
Mother's Day:अलवर। पति की मौत के बाद पत्नी का जीवन कठिन हो जाता है, लेकिन बच्चों की खातिर वही मां फिर पिता की भी भूमिका में आ जाती है। एक ऐसी मां की कहानी हम बता रहे हैं जिन्होंने पति की मौत के बाद बेटी के सपनों को ऐसे पंख लगाए कि आज वह हॉकी खेल की नेशनल प्लेयर बन गई। बेटी ने इतने मेडल जीते कि घर की खूंटियां कम पड़ गईं। सुबह-शाम बेटी के यही मेडल देखकर मां को नई ऊर्जा मिल रही है। मां का सपना है कि बेटी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाए। इसलिए पैसे की बाधा वह नहीं आना देना चाहती।
खुदनपुरी निवासी मनीषा के पति का निधन वर्ष 2018 में हो गया। मनीषा टूट गईं। बेटी की आयु करीब 11 साल थी। एक तरफ पति की मौत का दर्द था तो दूसरी तरह बेटी के सपने। मां ने बमुश्किल अपने को संभाला और काम की तलाश शुरू कर दी। मां अधिक पढ़ी-लिखी नहीं थी। ऐसे में नौकरी पाना आसान नहीं था। घर खर्च के लिए पैसे का संकट हुआ तो मनीषा ने सोचा कि जहां भी काम मिले उसे अपनाते हुए आगे बढ़ें। शुरूआत में एक जगह मजदूरी की जो पैसे मिलते उससे घर चलाती। बेटी के खेल के लिए कुछ सामग्री जुटाती। बेटी स्कूल-कॉलेज में खेल रही थीं। बेटी संजू वर्मा ने मां के सामने अपना लक्ष्य रखा। कहा कि वह नेशनल प्लेयर बनना चाहती हैं। मां ने संजू से यही कहा, वह खेल के लिए पैसे जुटा सकती हैं, लेकिन मेहनत संजू को ही करनी है।
यह भी पढ़ें : मदर्स डे पर विशेष: मां की सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं
मां और बेटी के बीच संघर्ष का रिश्ता शुरू हो गया। मां बेटी की खातिर मजदूरी दिन-रात करने लगी और बेटी मैदान में पसीना बहाना शुरू कर दिया। इस संघर्ष का परिणाम सभी के सामने है। बेटी ने हॉकी में नेशनल खेला और नाम कमाया। मां- बेटी का यह संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। आसमान छूने के सपने हैं। यही मेहनत मां और तेजी से कर रही हैं।
Published on:
14 May 2023 02:39 pm
बड़ी खबरें
View Allअलवर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
