
अलवर। हमारे गांव में लड़कियों को पढ़ाया नहीं जाता था। मीणा समाज में भी सयानी होते ही शादी कर दी जाती थी, ऐसे माहौल में मैं ज्यादा पढ़ लिख नहीं पाई। मैं पढ़ना चाहती थी, लेकिन समाज व पारिवारिक दबाव के चलते आठवीं पास करते ही मेरी शादी कर दी गई। मैंने बच्चों को पढ़ाया और अपना सपना पूरा किया। यह कहना है स्कीम नंबर आठ निवासी कमलेश मीणा का।
कमलेश ने कहा कि मेरा सपना बहुत पीछे छूट गया। मन में हमेशा मलाल रहा कि मैं ज्यादा नहीं पढ़ पाई, लेकिन तब मैंने ठाना कि मैं अपने बच्चों को पढाई में पीछे नहीं रहने दूंगी। मेरी अच्छे घर में शादी हुई। पति भागीरथ मीणा सरकारी सेवा में अच्छे पद पर थे। मुझे और बच्चों को कई कमी नहीं थी। मैंने बेटा और बेटी में कोई भेद नहीं किया, जिससे बेटियां भी अच्छे पद पर हैं।
कमलेश ने बताया कि मेरे सात बच्चे हैं जिसमें से पांच न्यायिक सेवा में हैं और एक बेटी बैंक में कार्यरत है। एक बेटा विधि की पढ़ाई कर न्यायिक सेवा में जाने की तैयारी कर रहा है। जब बच्चे पढ़ने जाने लगे तो मैंने एक ही बात कही कि जीवन एक बार ही मिलता है। अच्छा जीवन जीना है या बदनामी का, यह तुम पर निर्भर है।
इंसान बनने के लिए एक ही अवसर मिलता है। तुम स्कूल से सीधा घर आओ और अच्छे से पढ़ाई करो ताकि लोग तुहारा समान करें। यदि गलत रास्ते पर जाओगे तो जीवन बर्बाद हो जाएगा। बच्चों ने मेरी बात मानी। पढ़ाई के दौरान उनकी हर सुविधा का मैंने ध्यान रखा।
बडी बेटी दुर्गेश बैंक ऑफ पंजाब एंड सिंध में कार्यरत
बेटा निधिश दिल्ली न्यायिक सेवा में सीनियर जज
बेटी कामाक्षी जयपुर के सांगानेर में सीनियर जज
बेटी मीनाक्षी दिल्ली के कड़कड़नुमा कोर्ट में न्यायिक अधिकारी
बेटी सुमन मीणा धौलपुर में न्यायिक सेवा में
बेटी मोहिनी मीणा दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में
बेटा खगेश मीणा जोधपुर में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहा
Updated on:
11 May 2025 04:41 pm
Published on:
11 May 2025 04:30 pm
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