
प्रोफेसर डॉ. ममता शर्मा व प्रोफेसर डॉ. रामानंद यादव
विज्ञान ने जीवन काफी आसान बना दिया है। इसी का सहारा लेते हुए अलवर के आरआर कॉलेज के दो प्रोफेसर भी कई विषयों पर अध्ययन कर रहे हैं। एक महिला एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ममता शर्मा को अध्ययन के दौरान मां के दूध में कीटनाशक मिले तो वे भी हैरत में पड़ गईं। उन्होंने शोध किया और ऐसी मशीन बना डाली जिससे कीटनाशकों का प्रभाव मां के दूध में ही नहीं बल्कि सब्जियों, फलों व अन्य चीजों में भी न आए।
इसी तरह दूसरे प्रोफेसर डॉ. रामानन्द यादव ने पानी में फैल रहे प्रदूषण को कम करने का फार्मूला तैयार कर जीवन को आसान बनाने की कोशिश की है। दोनों ही शोध मानव को लंबी आयु प्रदान करेंगे।
राजर्षि महाविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. रामानंद यादव ने शोध के जरिए बताया कि यदि पानी में एल्युमिनियम सूक्ष्म मात्रा में डाले जाएं तो उसमें फ्लोराइड की मात्रा कम हो जाएगी। अलवर ही नहीं, प्रदेश के कई शहरों में पानी में फ्लोराइड बहुतायत में है।
इसके अलावा आर्सेनिक की मात्रा को कम करने का फार्मूला भी तैयार किया। इसके लिए उन्होंने मार्बल का पाउडर प्रयोग किया। उनका शोध अभी जारी है। उनके 45 शोधपत्र देश-दुनिया के प्रमुख जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। 9 विद्यार्थियों को वह पीएचडी करा चुके हैं।
राजर्षि महाविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ममता शर्मा ने अध्ययन किया कि फसलों में प्रयोग किए जा रहे कीटनाशक का असर सब्जी, फल, दूध में ही नहीं आ रहा बल्कि मां के दूध में भी आ रहा है। उसके बाद उन्होंने एक ऐसी मशीन तैयार की जो निर्धारित मात्रा में ही पेस्टीसाइड व उर्वरक का छिड़काव कर सके। उनके नाम सौ रिसर्च पेपर हैं। सात पेटेंट हैं।
उन्होंने खेत के पानी में पोषक तत्वों का पता लगाने के लिए सौर ऊर्जा उपकरण तैयार किया। हीट चार्ज ब्लूटूथ हेडफोन वाला हेलमेट, तरंग धारा का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करने वाला उपकरण, इंफ्रारेड से लैस नाइट विजन चश्मा, स्मार्ट सिटी गुणवत्ता विश्लेषण व तरंग ऊर्जा दोहन उपकरण तैयार किया। इन सभी का उनके नाम पेटेंट है। उनका शोध अभी जारी है।
Published on:
28 Feb 2025 03:30 pm
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