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नीलगाय की हत्या कानून के खिलाफ राजस्थान में मचा बवाल, 40 से अधिक संगठन धरने पर बैठे

Rajasthan News : राजस्थान में नीलगाय की हत्या कानून के खिलाफ 40 से अधिक संगठनों के 500 लोग धरने पर बैठे। वक्ताओं ने कहा- सत्ता किसी भी दल की हो, जो कानून को रद्द न करे, उसका बहिष्कार करो।

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Nilgai killing Law Against Ruckus in Rajasthan more than 40 Organizations sat on a Dharna

Rajasthan News : हरियाणा सरकार ने 4 फरवरी को वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम में संशोधन करके नील गाय को मारने की अनुमति देने का फैसला लिया। जिसके बाद राजस्थान में भी बवाल मच गया। राजस्थान में भी नीलगाय हत्या के कथित विवादास्पद कानून के खिलाफ लामबंदी दिखने लगी है। नीलगाय हत्या के कथित विवादास्पद कानून को रद्द करने की मांग को लेकर रविवार को अलवर में 40 से अधिक संगठनों के 500 लोग धरने पर बैठ गए। मन्नी का बड़ स्थित अहिंसा सर्किल पर कई दिव्यांग भी इस धरने में शामिल हुए।

सत्ताधीशों की हठधर्मिता व संवेदनहीनता पर जताया गया रोष

धरने का नेतृत्व दिगंबर जैन महिला महासमिति की अध्यक्ष सरला जैन व राजस्थान नीलगाय रक्षा आंदोलन से जुड़े ओमप्रकाश गुप्ता ने किया। धरने में सत्ताधीशों की हठधर्मिता व संवेदनहीनता पर रोष जताया गया। वक्ताओं ने कहा कि सत्ता किसी भी दल की हो, जो लोग नीलगाय जैसे निरीह वन्य प्राणी की हत्या के समर्थक व पक्षधर बने हुए हैं, उनका बहिष्कार किया जाए। अनेक वक्ताओं ने कहा कि खुद को हिंदू, सनातन व गोभक्त कहने वाली सरकार के लोग नीलगायों की हत्या पर चुप बैठे हुए हैं।

किसान बोले- हमने कभी हत्या की मांग नहीं की

धरने में शामिल किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि किसानों ने नीलगाय की हत्या की कभी मांग नहीं की। सत्ताधीश किसानों की आड़ में मीट लॉबी को लाभ पहुंचा रहे हैं। यह सरासर पाप है, जो बंद होना चाहिए।

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तत्काल कानून को वापस ले सरकार

धरने में शामिल सभी लोगों ने मांग की कि राजस्थान में नीलगाय हत्या को लेकर बने कानून व प्रावधान तत्काल वापस व समाप्त किए जाएं। नीलगायों को भी अन्य वन्य जीवों की तरह जीने का अधिकार है। सरकार जियो और जीने दो के सिद्धांत को चरितार्थ करे।

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हस्ताक्षर अभियान भी चलाया

धरना स्थल पर हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया। साथ ही हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजने का निर्णय लिया गया। साथ ही आंदोलन की अगली व्यूह रचना पर चर्चा की गई।

धरने में ये हुए शामिल

धरने पर सकल जैन समाज के सभी पदाधिकारी, जैन महिला संगठनों के साथ जैन संत विजयमुनि, पूर्व मंत्री नसरू खां, पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा, पूर्व निशक्तजन आयुक्त खिल्लीमल जैन, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अजीत यादव, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुधीर यादव, नगर परिषद के पूर्व सभापति अजय अग्रवाल, बजरंग दल के प्रांत संयोजक प्रेमसिंह राजावत, विहिप के जिला मंत्री विजेन्द्र खंडेलवाल, आर्य समाज के अध्यक्ष प्रदीप आर्य, बंधुआ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश याज्ञिक, इप्टा के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश शर्मा, गुरुद्वारा सिंह सभा के प्रधान एडवोकेट तारासिंह, भाकपा के शहर सचिव तेजपाल सैनी, संयुक्त व्यापार महासंघ के अध्यक्ष हरमीत सिंह मेहंदीरत्ता, किसान सभा के जिलाध्यक्ष भोलाराम शर्मा, असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस राजस्थान के स्टेट चेयरमैन सूरजमल कर्दम सहित अन्य संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

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