
अलवर में यहां औधोगिक विकास की थमी राह, दो दशकों से नहीं शुरु हो पाई बड़ी इकाई
राष्ट्रीय राजधानी परियोजना में आरम्भ से ही शामिल कस्बा खैरथल में औद्योगिक विकास दो दशकों से थम गया है। यहां कुछ औद्योगिक इकाइयां ही लगी हैं जो छोटे स्तर की है। यहां औद्योगिक विकास की विपुल संभावनाए थी जो धूमिल हो गई हैं। यहां 134 प्लॉटों पर औद्योगिक इकाई स्थापित है।
खैरथल में रीको ने सन 1981 -82 में जमीन का अधिग्रहण कर एक अप्रेल 1985 में डवलप एरिया घोषित करते हुए मात्र पच्चीस रुपये गज में जमीन का अलाटमेंट किया। बाद में एक जुलाई 2001 में रीको ने पास में खाली पड़ा जमीन का अधिग्रहण किया और प्लॉट काटे। यहां के औद्योगिक क्षेत्र में कोई बैंक नही है जबकि, पंजाब नेशनल बैंक की ओर से एक निजी फेक्ट्री के पास एटीएम जरूर लगा दिया है। रीको की ओर से पोस्ट ऑफिस के लिए एक प्लॉट रिजर्व किया था, लेकिन बाद में उस प्लाट को भी बेच दिया गया।
उस समय सबसे पहले कपड़ा मिल व कुछ उद्योग सरसो तेल के लगे लेकिन सरकार द्वारा मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने की वजह से बड़े उद्योग यहां आने से कतराने लगे ।
आज भी इस क्षेत्र में बिजली घर से आ रहे मुख्य रास्ते की चौड़ाई छोटी होने व जल भराव की स्थिति होने से अनेको इकाइयों में थोड़ी सी बरसात में पानी अंदर आ जाता है जिसका प्रमुख कारण रीको द्वारा अपने एरिये में बड़े नाले तो बनवा दिए लेकिन वे सभी गन्दगी से लबालब भरे पड़े हैं। कई औद्योगिक इकाइयों के संचालकों ने बताया कि यहां का रीको क्षेत्र वैसे खैरथल नगरपालिका के अंतर्गत आता है। नगरपालिका के वार्ड 17 व 23 के वार्ड पार्षद रीको एरिया वाले चुनते हैं। बिजली के बिल में नगरपालिका अरबन चार्ज वसूल रही ह,ै लेकिन पालिका की और से कोई सुविधा नही मिल पा रही रही है। उद्योगपतियों ने बताया कि जब नगरपालिका प्रसाशन से सफाई की बात की जाती है तो वे रीको का एरिया है बता कर अपना पल्ला झाडऩे लगते है । सरसो उत्पादन व खपत की सबसे बड़ी मंडी खैरथल में रीको से पूर्व पुरानी अनाज मंडी में ही एक्सपेलर मशीनों से सरसों का तेल बनाया जाता था, जो धीरे धीरे कछुआ चाल से चलते हुए रीको एरिया में शिफ्ट हुए। समय के बदलाव के साथ यहाँ कच्ची घानी के तेल की यूनिटें लगी जिनका तेल देश के कई राज्यो में जाने लगा।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अनेकों तेल मीले बन्द हो गई है उसका स्थान कपास की मिलों ने ले लिया है। आज यहां के रीको एरिये में लगभग 10 बड़ी कपास फैक्ट्ररी है जिनमे कपास में से काकड़े अलग व रुई अलग की जाती है। काकड़े स्थानीय बाजार में व हरियाणा में भेजे जाते हंै। वही रुई की गांठे बनकर गुजरात व पंजाब जाती है। फिलहाल यहां लगभग पांच हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है । कई बड़ी मिल मालिको ने श्रमिक ठेके पर रखे हुए जिनमे दूसरे प्रान्तों के लोग यहाँ काम कर रहे है।
आधे घंटे होती है पानी की आपूर्ति
रीको क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की बारे में जब उद्योगपतियों से जानकारी ली तो पता चला कि पानी की सप्लाई मात्र आधा घण्टे की होती है। टैंकरों से पानी
मंगवाया जाता है जबकि लाइट के लिए रीको में ही 33 के वी का अलग से बिजलीघर बना हुआ है। लाइट की समस्या ना के बराबर है लेकिन सही वोल्टेज नही मिलने से कई उद्योगों ने अपने खुद के बड़े जरनेटर सेट लगवाए हुए है। यहां चारोओर गन्दगी के ढेर अवश्य दिखाई देते है।
समस्याओं को लेकर यह कहते हैं उद्योगपति
स्थानीय कपास फैक्ट्री के मालिक किशनलाल गुप्ता ने
बताया कि हमारी प्रमुख मांग रीको की ओर से फायर बिग्रेड स्टेशन बनाया जावे जिससे सीजन के समय आग लगने की घटनाओं पर तुरन्त काबू पाया जा सके। व्यापारियों ने बताया कि कचरा उठाने में रीको बुरी तरह विफल रहा है ।चारो ओर गन्दगी के ढेर व बरसात में उनमे उठने वाले दुर्गंध से बेहद परेशान है । उद्योगपतियो ने अपना लघु उद्योग संघ का गठन किया हुआ है जिसके वर्तमान में सतीश गुप्ता अध्यक्ष हैं।
Published on:
29 Sept 2018 04:56 pm
