
उमेश शर्मा.अलवर।
बाघों की रखवाली और उनके मूवमेंट को लेकर सरिस्का प्रशासन संवेदनशील नहीं है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि महज चार बाघों के ही रेडियोकॉलर लगे हैं। इनमें भी दो ही काम कर रहे हैं। ऐसे में बाघ टेरेटरी छोड़कर बाहर निकलता है तो उसे ढूंढ़ना आसान नहीं होगा। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने कई बाघों के रेडियोकॉलर लगाने की अनुमति दे रखी है। इसके बाद भी सरिस्का अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं।
सरिस्का के बाघ एसटी-29 और एसटी-30 के रेडियाकॉलर चालू अवस्था में हैं, जबकि बाघिन एसटी-9 और एसटी-10 के रेडियोकॉलर काम नहीं कर रहे हैं। ये लंबे समय से बंद है। इसके बाद भी अधिकारियाें ने इन्हें सही कराने की जहमत तक नहीं उठाई। सरिस्का में अभी 25 वयस्क बाघ और बाघिन हैं। जिन्हें रेडियोकॉलर लगाया जा सकता है।
अधिकारियों की लापरवाही का उदाहरण है दो बाघों का गायब होना। एसटी-5 पिछले पांच साल से गायब है। रेडियोकॉलर लगने के बाद भी इसका पता नहीं चला। अब सरिस्का प्रशासन ने इसकी जांच बंद कर दी है। उधर एसटी-13 भी तीन साल से गायब है। यह सरिस्का का सबसे खूंखार टाइगर था। इसके भी रेडियोकॉलर लगा था, लेकिन इसका पता नहीं लगाया जा सका है। उधर, एस-2303 भी सरिस्का छोड़कर हरियाणा के झाबुआ के जंगल में विचरण कर रहा है। इसके भी रेडियोकॅलर नहीं लगा है, जिसकी वजह से पगमार्क के आधार पर ही इसे ट्रैस किया जा रहा है।
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इसी तरह एसटी-24 भी नई जगह की तलाश कर रहा है। यह अचरोल, रायसर, जमवारामगढ़ के आसपास नई टेरेटरी की तलाश कर रहा है। बताया जा रहा है कि इसका भाई एसटी-25 इसे भगा रहा है। इन दोनों बाघों के भी रेडियोकॉलर नहीं लगे हैं।
सरिस्का टाइगर कंजर्वेशन ऑर्गेनाइजेशन के सचिव चिन्मय मक मैसी ने बताया कि बाघों पर निगरानी के लिए रेडियोकॉलर लगाना जरूरी है। ताकि वह टेरेटरी के बाहर निकले तो उसे ट्रैस किया जा सके। मगर सरिस्का के ज्यादातर बाघों के रेडियोकॉलर नहीं लगने से परेशानी हो रही है।
कुल-43
शावक-18
बाघ-11
बाघिन-14
Updated on:
24 Aug 2024 11:15 am
Published on:
24 Aug 2024 11:14 am
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