
अलवर.
सरिस्का से भागकर झाबुआ के जंगल में टहल रहे टाइगर एस-2303 का व्यवहार बचपन से ही असामान्य रहा है। उसे शुरू से खेतों में जाने की आदत थी, लेकिन सरिस्का की रिसर्च टीम इस बात को लगातार अनदेखा करती रही और आज यह टाइगर अलवर छोड़ चुका है।
टाइगर एस-2303 सरिस्का के सबसे खूंखार एस-18 टाइगर और एस-19 टाइग्रेस का बेटा है। अभी उसके पिता और एस-2303 की बहन एस-2302 के बीच नजदीकिया बढ़ रही है। ऐसे में एस-18 के लिए बेटा प्रतिद्वंद्वी हो सकता है। टाइगर एस-2303 अभी पिता की टेरेटरी में ही घूम रहा था। उसे अपने पिता से लगातार चुनौती मिल रही थी। एक वजह यह भी है कि उसे सरिस्का छोड़ना पड़ा। इससे पहले भी वह रेवाड़ी जा चुका है और जनवरी में वहां से आने के बाद वह ततारपुर, प्रतापबंध, डढ़ीकर और आसपास के क्षेत्र में घूम रहा था, लेकिन वन विभाग की टीम ने उसे ट्रैंकुलाइज नहीं किया।
बाघ विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इस बाघ के लिए सरिस्का में कोई जगह नहीं है। पिता की टेरेटरी में वह जा नहीं सकता और देवरा, सीराबास, राइका, नाथूसर, पानीढाेल, लोज, बीनक इलाके में टाइगर नर्सरी है। जहां पहले से ही एसटी-़10, 12 के साथ करीब 12 टाइगर है, ऐसे में वहां भी उसकी जान को खतरा है।
टाइगर एस-2303 की उम्र पौने तीन साल है। ढाई साल बाद रेडियोकॉलर लगाया जा सकता है। ऐसे में सरिस्का प्रशासन सवालों के घेरे में है कि टाइगर को रेडियोकॉलर क्यों नहीं लगाया गया। अगर रेडियोकॉलर होता तो उसकी लोकेशन ट्रैस करके उसे वापस लाया जा सकता था।
सरिस्का टाइगर कंजर्वेशन ऑर्गेनाइजेशन के सचिव चिन्मय मक मैसी ने बताया कि टाइगर को अशांति बिलकुल भी पसंद नी है। वह सुकून में रहना पसंद करता है। लेकिन सरिस्का के आसपास कंक्रीट का जंगल बनता जा रहा है। सरिस्का टेरेटरी में उद्योग चल रहे हैं। अवैध माइंस चल रही है। इस वजह से टाइगर एस-2303 को माकूल वातावरण नहीं मिल पाया और उसने जंगल को छोड़ दिया। अगर इन निर्माणों को नहीं हटाया गया तो आने वाले समय में बाघों का यहां रहना मुश्किल हो जाएगा।
Published on:
23 Aug 2024 11:16 am
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