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राजस्थान का रण : राजस्थान चुनाव में यहां कांग्रेस के सामने है बड़ी चुनौती, इन नेताओं की होगी परीक्षा

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अलवर

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Hiren Joshi

Oct 03, 2018

Rajasthan Congress Challenge To Be On First Position In Alwar

राजस्थान का रण : राजस्थान चुनाव में यहां कांग्रेस के सामने है बड़ी चुनौती, इन नेताओं की होगी परीक्षा

अलवर. सत्ता की सीढ़ी चढऩे से पहले कांग्रेस को अलवर जिले में चौथे पायदान से पहले नम्बर पर पहुंचना बड़ी चुनौती होगी। गत एक दशक से जिले में कांग्रेस के वर्चस्व में कमी आने से यह राह आसान नही है। हालांकि गत लोकसभा उपचुनाव ने कांग्रेस को चुनावी ऑक्सीजन भले ही दी है, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में यही परिणाम दोहरा पाने की राह इतनी आसान नहीं होगी। गत विधानसभा चुनाव में बहरोड़ व राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को चौथे स्थान पर संतोष करना पड़ा था, वहीं तीन सीटों पर तीसरे नम्बर रहना पड़ा था।

प्रदेश में विधानसभा चुनाव के निर्धारित कार्यकाल में महज दो महीने का समय शेष है। ऐसे में प्रमुख राजनीतिक दलों ने सत्ता की सीढ़ी चढऩे के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। खासकर कांग्रेस एवं भाजपा ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी है। आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए फिर से जिले में वर्चस्व कायम करने की बड़ी चुनौती है, वहीं लंबे इंतजार के बाद जिले में कायम हुए राजनीतिक वर्चस्व को कायम रख पाना भाजपा के लिए भी आसान नहीं है।

लोकसभा उपचुनाव ने जगाई कांग्रेस की उम्मीद

अलवर लोकसभा उपचुनाव के परिणाम ने कांग्रेस की उम्मीदों को फिर से पंख लगा दिए। उपचुनाव के परिणाम में कांग्रेस ने अलवर संसदीय क्षेत्र के सभी आठों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को बड़े अंतर से हराया। इनमें तिजारा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को 12483, किशनगढ़बास में 11154, मुण्डावर में 8337, बहरोड़ में 21826, अलवर ग्रामीण में 32308, अलवर शहर में 25457, रामगढ़ में 35990, राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ में 54164 मतों की लीड मिली। यानि उपचुनाव में कांग्रेस को भाजपा से एक लाख 96 हजार 719 मत ज्यादा मिले। इस बड़ी जीत ने ही कांग्रेस में फिर से उत्साह का संचार हो पाया है।

राह आसान नहीं

कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव की राह इतनी आसान नहीं, जितनी दिखाई पड़ती है। इसका कारण है कि मौजूदा विधानसभा में अलवर जिले से कांग्रेस के एक विधायक हैं। वहीं 9 पर भाजपा काबिज है तथा एक राजपा के खाते में गई राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ की सीट भी अब भाजपा के खाते में जुड़ गई है। ऐसे में जिले में एक से 11 का सफर तय कर पाना आसान लक्ष्य नहीं है।