
राजस्थान का रण : इस केबिनेट मंत्री की विधानसभा सीट के चर्चे पूरे राजस्थान में, लेकिन कितना हो पाया है विकास, पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट
बहरोड़ विधायक डॉ.जसवंत यादव का पैतृक गांव तो कोटकासिम तहसील में सिलपटा है। बहरोड़ मे उनका आवास नहीं है। हालांकि बहरोड़ की राजनीति से करीब दो दशक से जुड़े हुए हैं। बहरोड़ मुख्यालय पर आते रहते हैं। जनसुनवाई भी करते हैं। फिर भी कस्बे के हालात बदतर हैं। कस्बे की समस्याओ की तरफ गंभीरता से ध्यान नही दिया गया।
अतिक्रमण
कस्बे में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की होड़ मची हुई है। सडक़ों के रास्तों पर अतिक्रमण की भरमार है। जिससे रास्ते संकरे हो गए। वाहनों का निकलना मुश्किल हो गया है। अतिक्रमण से जाम की समस्या बड़ी हो गई है।
पेयजल
कस्बे में 25 करोड़ की लागत से पेयजल योजना पर दो वर्ष से काम चल रहा है। धीमी गति से चलने के कारण लोगों को पानी तो नहीं मिल पाया परन्तु सडक़ खुदाई कर डालने से मरम्त नहीं करने से कस्बे के हर वार्ड में लोग परेशान है। कस्बे के कई वार्डो मे तो पानी आता ही नही है। लोगो को निजी नलकूपो के भरोसे हैं।
चिकित्सा
कस्बे के 100 बैड के सरकारी अस्पताल मे सुविधाओं का अभाव है। नेत्र अस्पताल मे चिकित्सक नही है। जांचो की कोईसुविधा नही है। सिटी स्कैन की मशीन भी नही है।जिससे मरीजो को निजी अस्पतालो मे मंहगे दामो पर उपचार कराना पड़ रहा है।
डे्रनेज
कस्बे में पानी निकासी की कोई व्यवस्था नही है। जोहड़ों पर अतिक्रमण है। जिससे गंदा पानी भराव की समस्या बनी हुई है कस्बे के सेसाड़ मोहल्ला व अनेक वार्डो में तो गंदा पानी भराव के चलते रास्तो मे पानी भराव से लोग त्रस्त है।
शिक्षा
कस्बे के राजकीय महाविद्यालय में आधा दर्जन से अधिक व्याख्याताओ के पद रिक्त है। जिससे शिक्षण व्यवस्था अस्त व्यस्त है। कॉलेज मे सुविधाओ का अभाव है ।
यातायात
कस्बे में यातायात सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। यात्री परेशान है । लोकल रूटो पर रोड़वेज बसो का अभाव है । जिसके चलते लोगो को डग्गामार वाहनो मे सफर करना पड़ रहा है।
Published on:
29 Oct 2018 02:38 pm
