
रोडवेज कर्मियों की हड़ताल से राजस्थान के इस जिले में रोडवेज को हुआ इतने सौ करोड़ रुपए का नुकसान, जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान
अलवर. रोडवेज की अनिश्चितकालीन हड़ताल से जनता बे-बस नजर आ रही है। जनता को जान जोखिम में डाल डग्गेमार वाहन या फिर खचाखच भरी लोक परिवहन बसों में सफर करने को मजबूर हैं। पिछले एक सप्ताह से जनता इस भारी परेशानी को भोग रही है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। बात केवल अलवर जिले की करें तो यहां रोडवेजकर्मियों की हड़ताल से पिछले सात दिनों में सरकारी खजाने को करीब 2.40 करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है।
प्रदेश व्यापी आह्वान के चलते राज्य के सभी रोडवेजकर्मी 17 जुलाई से अनिश्चितकालीन चक्काजाम हड़ताल पर हैं। जिसके राज्य के सभी डिपो में रोडवेज बसों के पहिये थम गए हैं। किसी भी रूट पर रोडवेज बसों का संचालन नहीं हो रहा है। अलवर जिले के अलवर, मत्स्य नगर और तिजारा की 292 बसें रोजाना 1 लाख 7 हजार 600 किलोमीटर दौड़ती हैं, जिससे सरकारी खजाने में करीब 34 लाख रुपए आते हैं। सात दिन से बसों की हड़ताल के कारण सरकारी खजाने को करीब 2.40 करोड़ रुपए की चपत लगी है। सरकार की मंशा को देखते हुए फिलहाल हड़ताल समाप्त होने के आसार अभी नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे घाटा और बढ़ सकता है।
दैनिक यात्रियों पर दोहरी मार
जिले के तीनों आगारों में सैकड़ों दैनिक यात्री हैं। जिन्होंने रोडवेज को एडवांस पैसा देकर पूरे माह का दैनिक पास बनवाया हुआ है। रोडवेज की हड़ताल के कारण इन दैनिक यात्रियों को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। वह अपने पूरे माह की यात्रा का पैसा पहले ही जमा करा चुके हैं। अब रोडवेज का संचालन बंद होने से उन्हें जेब से पैसे खर्च कर लोक परिवहन बसों या डग्गेमार वाहनों में सफर करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि सरकार की ओर से अनुबंध के तहत लोक परिवहन बसों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन लोक परिवहन बसों में दैनिक पास सेवा लागू नहीं है।
लोक परिवहन बसें कूट रही चांदी
रोडवेज बसों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से लोक परिवहन बसों की चांदी हो गई। जिन रूटों पर लोक परिवहन बसों का संचालन हो रहा है। वहां सभी लोक परिवहन बसें खचाखच भरकर चल रही हैं। जिससे उनकी आय कई गुना बढ़ गई है। वहीं, डग्गेमार वाहनों की कमाई खूब हो रही है। रोडवेज बसों का संचालन बंद होने से ये वाहन चालक यात्रियों से मनमाना किराया भी वसूल रहे हैं।
कहीं रोडवेज का निजीकरण की मंशा तो नहीं!
पूरे प्रदेश में रोडवेज की चक्काजाम हड़ताल पिछले सात दिनों से लगातार जारी है। ऐसा पहली बार हुआ है जब रोडवेज की चक्काजाम हड़ताल इतनी लम्बी चली हो। रोडवेज बसों का संचालन बंद होने से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद भी सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार नहीं कर रही है। रोडवेज यूनियनें इसके पीछे सरकार की रोडवेज के निजीकरण की मंशा बता रही हैं।
इनका कहना है
पिछले सात दिनों से रोडवेज बसों का संचालन पूरी तरह से बंद हैं। जिसके कारण मत्स्य नगर आगार को रोजाना करीब 13 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
- रामजीलाल मीणा, मुख्य प्रबंधक, मत्स्य नगर आगार।
रोडवेज बसों की चक्काजाम हड़ताल के कारण अलवर आगार में रोजाना 44 हजार किलोमीटर के फेरे निरस्त हो रहे हैं। बसों के संचालन के बारे में अभी उच्चाधिकारियों से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।
- विश्राम मीणा, मुख्य प्रबंधक, अलवर आगार।
तिजारा आगार में कुल 49 रोडवेज और 25 अनुबंधित बसें हैं। हड़ताल के कारण सभी बसों का संचालन पिछले सात दिन से बंद हैं। रोजाना 26 हजार 600 किलोमीटर निरस्त होने से करीब 9 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
- पवन कुमार कटारा, मुख्य प्रबंधक, तिजारा आगार।
Updated on:
24 Sept 2018 02:07 pm
Published on:
24 Sept 2018 02:07 pm
