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Rajasthan News : IAS डॉ. आर्तिका शुक्ला का लीक से हटकर ‘नवाचार’, चीफ सेक्रेटरी ने भी की तारीफ, जानें ऐसी क्या है नई बात? 

अलवर जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला के नवाचार से राजस्थान की पहली 'पार्क लाइब्रेरी' (विद्या कुंज) शुरू हुई है, जिसकी सराहना प्रदेश के मुख्य सचिव ने भी की है। 5000 पुस्तकों की क्षमता वाली इस लाइब्रेरी को समृद्ध बनाने के लिए जिला प्रशासन ने आमजन से अगले 15 दिनों तक पुस्तकें दान करने की भावुक अपील की है।

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अलवर

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Nakul Devarshi

Apr 12, 2026

IAS डॉ. आर्तिका शुक्ला और सीएस वी. श्रीनिवास

IAS डॉ. आर्तिका शुक्ला और सीएस वी. श्रीनिवास

राजस्थान के सिंहद्वार अलवर से ज्ञान और हरियाली के संगम की एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसकी गूँज अब पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। डिजिटल युग में किताबों से दूरी कम करने के उद्देश्य से अलवर जिला प्रशासन ने एक अभिनव पहल करते हुए प्रदेश की पहली 'पार्क लाइब्रेरी' स्थापित की है। जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला के इस विजन को 'विद्या कुंज' का नाम दिया गया है, जो अब राजस्थान में लाइब्रेरी मूवमेंट को एक नई मजबूती देने के लिए तैयार है।

बुद्ध विहार के डी-ब्लॉक में 'विद्या कुंज' का उदय

नगर विकास न्यास (UIT) के सहयोग से शहर की बुद्ध विहार कॉलोनी के डी-ब्लॉक स्थित पार्क में इस लाइब्रेरी को विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका वातावरण है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि पाठक प्रकृति की हरियाली और खुले वातावरण के बीच एकाग्र होकर अध्ययन कर सकें।

लाइब्रेरी की मुख्य विशेषताएं:

  • आधुनिक कांच का हॉल: लाइब्रेरी का मुख्य आकर्षण यहाँ बना अत्याधुनिक कांच का हॉल है, जहाँ बैठकर पढ़ना एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है।
  • 5000+ क्षमता: इस लाइब्रेरी में 5 हजार से अधिक पुस्तकें रखने की क्षमता है।
  • विविध विषयों का संग्रह: वर्तमान में यहाँ साहित्य, प्रतियोगी परीक्षा, सामान्य ज्ञान, धार्मिक और अन्य महत्वपूर्ण विषयों की लगभग 1500 पुस्तकें उपलब्ध हैं।

कलक्टर की अपील: 'अपनी पुरानी यादों और ज्ञान को करें दान'

जिला कलक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला ने इस पहल को जन-सहभागिता (Public Participation) से जोड़ने के लिए जिले के नागरिकों, भामाशाहों और समाजसेवी संस्थाओं से एक विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें ज्ञान, संस्कृति और संस्कार का भंडार होती हैं। उन्होंने आमजन से आह्वान किया है कि वे अपने घरों में रखी उपयोगी पुस्तकों को इस लाइब्रेरी के लिए दान करें।

कैसे और कब करें दान?

प्रशासन ने पुस्तक डोनेट करने के लिए आगामी 15 दिनों का विशेष समय निर्धारित किया है। कोई भी नागरिक बुद्ध विहार स्थित पार्क लाइब्रेरी में आकर अपनी पुस्तकें भेंट कर सकता है, जो आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवारने में मददगार साबित होंगी।

शिक्षा और पर्यावरण का अद्भुत संगम

अक्सर देखा जाता है कि बंद कमरों की लाइब्रेरी में बैठने से पाठक जल्दी ऊब जाते हैं, लेकिन 'पार्क लाइब्रेरी' का कॉन्सेप्ट इस सोच को बदल रहा है। यहाँ की ताजी हवा और चिड़ियों की चहचहाहट के बीच पढ़ाई का माहौल न केवल तनाव कम करता है, बल्कि एकाग्रता भी बढ़ाता है। यह मॉडल अब राजस्थान के अन्य शहरों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।

राजस्थान के लिए अनुकरणीय पहल: मुख्य सचिव

अलवर जिला प्रशासन के इस नवाचार की सराहना प्रदेश स्तर पर शुरू हो गई है। राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने इस पहल को 'लाउडेबल' (प्रशंसनीय) बताते हुए डॉ. आर्तिका शुक्ला और उनकी टीम को बधाई दी है। सीएस ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि "विद्या कुंज" राजस्थान में पुस्तकालय आंदोलन को मजबूत करने की दिशा में एक शानदार कदम है।

कौन हैं IAS डॉ. आर्तिका शुक्ला?

डॉ. आर्तिका शुक्ला राजस्थान कैडर की एक प्रतिष्ठित IAS अधिकारी हैं, जो वर्तमान में अलवर जिला कलक्टर के रूप में कार्यरत हैं। वे अपनी कार्यशैली, नवाचारों और शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए देश भर में जानी जाती हैं।

  • UPSC टॉपर: डॉ. आर्तिका शुक्ला ने साल 2015 की सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) में देश भर में चौथी रैंक (AIR 4) हासिल की थी। सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के अपने पहले ही प्रयास में यह बड़ी सफलता पाई थी।
  • डॉक्टर से IAS: प्रशासनिक सेवा में आने से पहले वे एक डॉक्टर थीं। उन्होंने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC), दिल्ली से MBBS की डिग्री हासिल की है।

मूल निवासी: वे मुख्य रूप से वाराणसी (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली हैं।

  • पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनके पिता डॉ. बृजेश शुक्ला एक रेडियोलॉजिस्ट हैं। उनके दो बड़े भाई भी प्रशासनिक सेवाओं में हैं (एक IAS और एक IRTS)।
  • जीवनसाथी: डॉ. आर्तिका शुक्ला ने साल 2015 बैच के ही IAS अधिकारी जसमीत सिंह संधू से शादी की है।

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